G7 में मध्यस्थता से अमेरिका के पीछे हटने से निराश पाकिस्तान ने परमाणु जंग की धमकी दे डाली है। देश के नाम संबोधन में पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने कहा कि कश्मीर के लिए हम किसी भी हद तक जाएंगे। दोनों तरफ परमाणु हथियार हैं। अगर युद्ध हुआ तो दोनों देशों के साथ पूरी दुनिया तबाह होगी। यूएन की जिम्मेदारी है कि कमजोर के साथ खड़े हों, लेकिन वह हमेशा ताकतवर का साथ देता है। आज दुनिया की ताकतें और मुसलमान देश भी मजबूरी के कारण हमारे साथ नहीं हैं।
जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाने की पाकिस्तान की एक और कोशिश भी नाकाम रही। अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न सिर्फ इस मुद्दे पर भारत का पक्ष सामने रखा। साथ ही, दुनिया को यह भी बता दिया कि भारत-पाकिस्तान के मसलों में किसी मध्यस्थता की जरूरत नहीं है।
अब जब मोदी सरकार ने फैसला कर लिया है कि मौजूदा परिस्थितियों में जब पाकिस्तान तमाम बेरुखी और नाराजगी दिखाते हुए तमाम इकतरफा फैसले करने पर आमादा हो चला है, तमाम भड़काऊ बातें कह रहा है, तो उसे कोई भी जवाब रक्षा मंत्री के माध्यम से ही दिया जाना चाहिए। पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया गया है कि ऐसे में जब पाकिस्तान सख्त लहजे पर उतर आया है, परमाणु युद्ध सरीखा माहौल दिखाने का प्रयास कर रहा है, तो यही सही!
जम्मू कश्मीर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने अनुच्छेद 370 को खत्म करके जम्मू-कश्मीर का विशेष दरजा समाप्त किया है, तभी से बहुत कम लोगों ने गौर किया होगा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ही पाकिस्तान को लेकर नई नीति संबंधी बयान पर बयान दिए जा रहे हैं, जबकि गृह मंत्री अमित शाह और सीसीएस (सुरक्षा संबंधी मामलों की कैबिनेट कमेटी) से जुड़े अन्य मंत्री चुप्पी-सी साधे हुए हैं।
पाकिस्तान को लेकर भारत की नीति को लेकर कुछ कह भी रहे हैं, तो पहले से घोषित नीति को ही दोहराए जा रहे हैं। दरअसल, सीसीएस से जुड़े विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान संबंधी मौजूदा नीति को ही दोहराया है, जबकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने पूरी तरह चुप्पी साधे रखी। केंद्र द्वारा जम्मू-कश्मीर को राज्य के दरजे से कम करके दो केंद्र-शासित प्रदेशों-जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख-में विभाजित करने के बाद से सीतारमन ने पाकिस्तान के बारे में एक भी बयान जारी नहीं किया है।
पाकिस्तान को लेकर भारत की इसे चाहे उलझन में डाल देने वाली या अच्छे से सोची-समझी रणनीति, जिसमें कश्मीर में मोदी सरकार के मास्टर स्ट्रोक से पाकिस्तान साफ-साफ रिपब्लिक ऑफसल्किस्तान (नाराज देश) बन गया है, कहें लेकिन इसने पाकिस्तान को बेहद नाराज कर डाला है। उसकी नाराजगी इस कदर बढ़ गई है कि भारत से राजनयिक संबंध, व्यापार और लोगों से लोगों के बीच संपर्क जैसी संधियों को इकतरफा तोड़ डालने पर आमादा है। उसके कृत्य खुद पर गोल दागने जैसे हैं, और भारत पर इनका रंच मात्र फर्क नहीं पड़ने वाला। दशकों से पाकिस्तान चालाकी से सारा दोष भारत के मत्थे मढ़ता रहा है, लेकिन इस बार भारत ने पूरी तरह से उसे भरमा दिया है, आज पाकिस्तान की बारी है भारत की गुगली पर फंसने की।
राजनाथ सिंह के पाकिस्तान-केंद्रित दो महत्त्वपूर्ण बयानों पर गौर करते हुए उनका विश्लेषण किया जाना आवश्यक है। राजनाथ का 16 अगस्त को पाकिस्तान-केंद्रित पहला नीतिगत बयान आया जिसमें उन्होंने संकेत दिया कि भारत का परमाणु हथियारों का पहले इस्तेमाल करने का सिद्धांत कोई पत्थर पर खिंची लकीर नहीं है। उस दिन राजनाथ सिंह पोखरण के दौरे पर पहुंचे थे।
पोखरण वो जगह है जहां अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने 1998 में भारत का दूसरा परमाणु परीक्षण किया था। इस दौरे के दौरान राजनाथ ने ट्वीट करके पहले पहल कहा, ‘‘पोखरण ही वह स्थान है जो अटल जी के भारत को परमाणु ताकत बनाने के संकल्प का साक्षी है, और भारत इस ताकत का ‘‘पहले इस्तेमाल’ न करने को प्रतिबद्ध रहा है। भारत ने पूरे मन से इस सिद्धांत का पालन किया है। भविष्य में क्या होता है, यह परिस्थतियों पर निर्भर करेगा।’ उसके बाद 18 अगस्त को उन्होंने दूसरा नीतिगत बयान दिया। कहा कि ‘‘पाकिस्तान से अब जो भी बातचीत होगी वह केवल पाक-अधिकृत कश्मीर (पीओके) पर होगी।’ यह बात उन्होंने चंडीगढ़ के निकट भाजपा द्वारा आयोजित ‘‘जन आशीर्वाद यात्रा’ को हरी झंडी दिखाते हुए कही। तो इन बयानों के क्या आशय हैं?
मोदी सरकार ने फैसला कर लिया है कि मौजूदा परिस्थतियों में जब पाकिस्तान तमाम बेरुखी और नाराजगी दिखाते हुए तमाम इकतरफा फैसले करने पर आमादा हो चला है, तमाम भड़काऊ बातें कह रहा है, तो उसे कोई भी जवाब रक्षा मंत्री के माध्यम से ही दिया जाना चाहिए। दूसरे शब्दों में कहें तो मोदी सरकार ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है कि ऐसे में जब पाकिस्तान सख्त लहजे पर उतर आया है, युद्ध सरीखा माहौल दिखाने का प्रयास कर रहा है, तो यही सही। युद्ध होता है, तो उस तक भारत यह संदेश पूरी शिद्दत से देना चाहता है कि भारत भी पीछे हटने वाला नहीं है। किसी भी स्थिति का सामना करने के लिएपूरी तरह तैयार है। कह सकते हैं कि भारत की पाकिस्तान संबंधी नीति को केवल रक्षा मंत्री ही मुखर कर रहे हैं, और अन्य कोई नहीं।

राजनाथ सिंह के जरिए भारत ने अपने सख्त संदेश से पाकिस्तान की परमाणु शक्ति होने की गीदड़ भभकी का जवाब वैसे ही दिया है, जैसे हाल में पाकिस्तान पर दो सर्जिकल स्ट्राइक्स करके दिया था। राजनाथ ने अपना सामरिक संदेश पाकिस्तान के पाले तक पहुंचा दिया है। सच तो यह है कि भारत के रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान को चेता दिया है कि ज्यादा लाल पीला होने की जरूरत नहीं है क्योंकि जरूरत पड़ने पर भारत अपना परमाणु बटन पहले भी दबा सकता है। पीओके संबंधी बयान से पाकिस्तान के सैन्य एवं सामरिक प्रतिष्ठान में डर बिठाया गया है कि भारत पीओके को वापस लेने के लिए जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। और इस प्रकार सदा सदा के लिए कश्मीर का विवाद भी हल कर लेगा। बेशक, बयान भ्रमाने के मकसद से ज्यादा हैं। इनसे बात को अच्छी तरह से समझा दिया गया है कि भरमाने या उलझाने में पाकिस्तान का ही ठेका नहीं है, भारत भी उसके साथ उसी की जुबान में बात करेगा। फैसला उसने कर लिया है।
दो दशक पहले परमाणु ताकत बनने के बाद से जैसी भाषा पाकिस्तान बोलता आया है, भारत भी उसी भाषा में उसे जवाब देना चाहता है। कहने की जरूरत नहीं कि पाकिस्तान भारत के रुख से घबरा गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का एक बयान आया है, ‘‘भारत के रक्षा मंत्री के बयान की सामग्री और समय बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, और इससे भारत की गैर-जिम्मेदारी की झलक मिलती है।’ पहले होता यह था कि पाकिस्तान की तरफसे आने वाले बयानों पर भारत इस प्रकार की प्रतिक्रिया व्यक्त करता था। लेकिन अब भारत ने खेल का नियम बदल दिया है। अब अमित शाह और जयशंकर के बयानों पर भी गौर करें। अमित शाह ने छह अगस्त को लोक सभा में कहा कि भारत पाक के कब्जे वाले अपने हिस्से पर दावा जारी रखेगा।
उन्होंने अलगाववादी हुर्रियत कांफ्रेंस के साथकोई बात करने से भी इनकार कर दिया। इससे पूर्व तीन अगस्त को जयशंकर ने अपने अमेरिकी समकक्षी माइक पोम्पियो को बैंकाक में स्पष्ट कर दिया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच मसल दुतरफा है, और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता भारत को स्वीकार नहीं है। उनका बयान कुछ दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के आलोक में आया। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह का 18 अगस्त को बयान था कि भारत पीओके को वापस हासिल करेगा। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन चुप्पी साधे रही हैं, और रक्षा मंत्री की मुखरता साफ कर रही है कि भारत अब सख्ती बरतने की मंशा रखता है।
- राजीव







