यह सच हैं कि कई उपग्रह कक्षा में स्थापित करने जैसी उपलब्धियां पहले से ही भारत ने अपने खाते में दर्ज कर ली हैं। भारत अब तक अपने कई उपग्रह अपने ही प्रक्षेपणयानो और अंतरिक्ष केंद्रों से छोड़ता रहा है। इसके अलावा दूसरे देशों के उपग्रहों को भी कक्षा में स्थापित करने में सफलता प्राप्त की है। इसी क्रम में भारत ने बुधवार को अब तक के अपने सबसे भारी उपग्रह जीसैट- 11 को कक्षा में स्थापित कर कामयाबी का झंडा बुलंद किया है।

यह उपग्रह फ्रेंच गुयाना स्थित कोरू अंतरिक्ष केंद्र से एरियन स्पेस रॉकेट से छोड़ा गया। यह अंतरिक्ष में कारोबार का समय है। यह अच्छी बात है कि भारत इस क्षेत्र में भी लगातार कामयाब होता जा रहा है, ऐसी ही एक बड़ी सफलता इसी साल 12 जनवरी को मिली थी, जब भारत में श्रीहरिकोटा से पीएसएलवी यानि सोलर सैटलाइट लॉन्च व्हीकल से अपने 3 उपग्रह छोड़े थे। इसके अलावा 6 देशों कनाडा, फ्रांस, फिनलैंड, दक्षिण कोरिया, अमेरिका और ब्रिटेन के भी 28 उपग्रह अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक पहुंचाए थे।

गौरतलब है कि यह वह समय है जब इंटरनेट की रफ्तार का महत्व बढ़ चुका है। इस संदर्भ में संचार उपग्रह का उपयोग इंटरनेट की रफ्तार बढ़ाने में काफी सहायक होगा। यह अगली पीढ़ी का संचार उपग्रह है। जो आगे 15 साल से ज्यादा समय तक काम करने में सक्षम होगा। 5800 सौ किलोग्राम का यह जीसेट- 11 इसरो द्वारा बनाया गया है और अब तक का सबसे भारी उपग्रह है। इसे धरती से 36000 किलोमीटर ऊपर भूस्थिर कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है।

वैज्ञानिकों के लिए यह एक बड़ी चुनौती थी क्योंकि भारत ने इससे पहले इतना भारी उपग्रह कभी नहीं छोड़ा गया था। आज दुनिया में इंटरनेट का युग है। भारत को भी तेज रफ्तार इंटरनेट चाहिए, लेकिन अभी यहां ऐसा संभव नहीं हो पाया है। इसलिए जीसैट श्रंखला के उपग्रह इंटरनेट और मोबाइल क्रांति के लिए ही तैयार किए जा रहे हैं। इस श्रंखला के दो उपग्रह पहले छोड़े जा चुके हैं और एक जीसेट20 अगले साल छोड़ने की योजना है। इस संबंध में इसरो के दावे पर गौर करें तो जीसेट- 11 जिस रफ्तार से डाटा भेजेगा वह अकल्पनीय है। इसमें जो 40 ट्रांसपोंडर लगे हैं वे 14 गीगाबाइट प्रति सेकंड की रफ्तार से डाटा भेजेंगे तब हमें ज्यादा तेज ब्रॉडबैंड सेवा मिल सकेगी जिसकी आज हमें सख्त जरूरत है।







