मंदी की मार: अब पारले जी भी करेगा 10 हजार कर्मचारियों की छटनी!

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नई दिल्ली,21 अगस्त 2019: मंदी की मार अब बिस्कुट कंपनियों पर भी पड़ने वाली है सूत्र बताते हैं कि जीएसटी के चलते उनका कारोबार धराशायी हो रहा है. बता दें कि पहले ऑटोमोबाइल सेक्टर, फिर इस्पात और अंडरगारमेंट्स उद्योग में मंदी की खबरें आयीं. जिससे हजारों लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा. अब अगर मीडिया ख़बरों कि माने तो एफएमसीजी सेक्टर में बिस्किट बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी पारले को भी कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ सकती है. ऐसा पारले के उत्पादों की मांग में कमी आने के कारण करना पड़ेगा. कंपनी 8 से 10 हजार लोगों की छंटनी कर सकती है.

एक अन्य बड़ी बिस्किट और डेयरी प्रोडक्ट्स कंपनी ब्रिटानिया के मैनेजिंग डायरेक्टर वरुण बेरी ने पिछले हफ्ते कहा था कि ग्राहक 5 रुपये के बिस्किट पैकेट भी खरीदने में कतरा रहे हैं. वे 5 रुपये के भी उत्पाद खरीदने से पहले दो बार सोच रहे हैं, जिससे वित्तीय समस्या की गंभीरता का पता चलता है. बेरी ने कहा था कि हमारी ग्रोथ सिर्फ छह फीसदी हुई है. मार्केट ग्रोथ हमसे भी सुस्त है.

जीएसटी घटाने की मांग की:

जानकारी के अनुसार कंपनी ने सरकार से 100 रुपये प्रति किलो वाली बिस्किट पर जीएसटी घटाने की मांग की है. ये बिस्किट आमतौर पर 5 रुपये या उससे कम के पैकेट में बिकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी के कैटिगरी हेड मयंक शाह ने कहा कि अगर सरकार ने हमारी मांग नहीं मानी तो हमें अपनी फैक्टरियों में काम करने वाले 8,000-10,000 लोगों को निकालना पड़ेगा. बिक्री घटने से हमें भारी नुकसान हो रहा है.

अब 18 फीसदी टीएसटी?

जिस वक्त जीएसटी लागू नहीं था, उस वक्त 100 रुपये से कम कीमत वाली बिस्किट पर 12 फीसदी टैक्स लगता था. कंपनी को उम्मीद थी कि सस्ते बिस्किट पर जीएसटी की दर 5 फीसदी की जायेगी. वहीं प्रीमियम बिस्किट पर 12 फीसदी जीएसटी रखी जायेगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ, सरकार ने जब जीएसटी लागू किया तो सभी प्रकार की बिस्किट पर 18 फीसदी जीएसटी रखा गया. इसके कारण कंपनियों को दाम बढ़ाने पड़े. दाम बढ़ने के कारण बिक्री में कमी आ गयी. मयंक शाह ने बताया कि पारले को भी 5 पर्सेंट दाम बढ़ाना पड़ा, जिससे सेल्स में गिरावट आयी.

दस हजार करोड़ की बिक्री:

10 प्लांट चलाने वाली इस कंपनी में एक लाख कर्मचारी काम करते हैं. पारले के पास 125 थर्ड पार्टी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हैं. कंपनी की सेल्स का आधा से ज्यादा हिस्सा ग्रामीण बाजारों से आता है. पारले-जी, मोनैको और मैरी बिस्किट बनाने वाली पारले की सेल्स 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा होती है.

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