कश्मीर लिबरेशन फ्रंट पर सरकार ने लगाया बैन, महबूबा मुफ्ती बोलीं हानिकारक कदम

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file photo

आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं होगा, केंद्र सरकार की नीति के तहत की गई कार्रवाई

नई दिल्ली, 23 मार्च 2019: पुलवामा हमले के बाद से आतंकियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के तहत हर मोर्चे पर सख्त कदम उठा रही है इसी कड़ी में उसने केंद्र सरकार ने यासीन मलिक के नेतृत्व वाले जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) को शुक्रवार को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंधित कर दिया। यह जानकारी केंद्रीय गृह सचिव राजीव गौबा ने एक संवाददाता सम्मेलन में दी। इससे पहले केंद्र ने जम्मू एवं कश्मीर की जमात-ए-इस्लामी पर प्रतिबंध लगाया था।

श्री गौवा ने कहा कि कई ¨हिंसक कृत्यों और 1988 से आतंकवाद प्रभावित राज्य में अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के कारण इस संगठन पर प्रतिबंध लगाया गया है। उसकी विध्वंसक और ¨हसक गतिविधियों को सूचीबद्ध करते हुए गौबा ने कहा कि जेकेएलएफ ने कश्मीर घाटी में अलगाववादी विचारधारा को बढ़ावा दिया और आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की केंद्र सरकार की नीति के तहत यह कार्रवाई की गई है।

जेकेएलएफ की गिनायीं करतूतें :

गौवा ने कहा कि 1989 में जेकेएलएफ द्वारा कश्मीरी पंडितों की हत्याओं से घाटी से उनका पलायन शुरू हुआ। मलिक घाटी से कश्मीरी पंडितों के पलायन का षडयंत्रकारी और उनके नरसंहार के लिए जिम्मेदार है। सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति ने अलगाववादी समूह पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जेकेएलएफ के खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज हैं।

उन्होंने कहा कि यह संगठन तत्कालीन वीपी सिंह सरकार में गृह मंत्री रहे मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद के अपहरण और वायु सेना के चार कर्मियों की हत्या के लिए जिम्मेदार है। मलिक अभी जम्मू की कोट बलवाल जेल में बंद है। रूबिया सईद के अपहरण और श्रीनगर में चार वायुसेना कर्मियों की हत्या के तीन दशक पुराने मामलों में उसके मुकदमे का सामना करने की संभावना है। जेकेएलएफ की स्थापना 1970 के मध्य में बर्मिंघम में पाकिस्तानी नागरिक अमानुल्लाह खान द्वारा की गई थी। संगठन 1971 में तब सुर्खिया में आया जब उसके सदस्य ने श्रीनगर से जम्मू जा रहे इंडियन एयरलाइंस के एक विमान को अगवा कर लिया।

महबूबा मुफ्ती बोलीं: संगठन पर प्रतिबंध से क्या हासिल होगा?

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने एक ट्वीट में कहा, ऐसे हानिकारक कदमों से कश्मीर सिर्फ खुली जेल में तब्दील होगा। मुफ्ती ने कहा, जम्मू-कश्मीर मुद्दे के हल के लिए यासीन मलिक ने काफी समय पहले ¨हिंसा की आलोचना की थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी जी की वार्ता पहल में उन्हें एक पक्षकार के तौर पर देखा गया था। उनके संगठन पर प्रतिबंध से क्या हासिल होगा?

 

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