30 मई तक चुनाव आयोग को चंदे की जानकारी दें पार्टियां, मोदी को घेरने के लिए कांग्रेस पार्टी ने फिर कसी कमर, राहुल को मिली संजीवनी
नई दिल्ली, 12 अप्रैल 2019: पार्टियों को लेकर मिलने वाले राजनितिक चंदे को लेकर एक बार फिर मुद्दा गरम हो गया है। और अब इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। चुनावी बॉन्ड्स की वैधता को लेकर हुई सुनवाई पर फैसला देते हुए शीर्ष अदालत ने कहा है कि सभी राजनीतिक दलों को चुनावी बॉन्ड के तहत मिले फंड की जानकारी चुनाव आयोग को देनी चाहिए।
बता दें कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सभी पॉलिटिक्ल पार्टियां 15 मई तक मिलने वाली डोनेशन की जानकारी 30 मई तक निर्वाचन आयोग को सीलबंद लिफाफे में सौंपें।
सीजेआई रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए यह जरूरी है कि इलेक्टोरल बॉन्ड्स के जरिए मिली डोनेशन का खुलासा किया जाए।
राजनीतिक दलों द्वारा दी जाने वाली जानकारी में उन्हें डोनेशन में मिली रकम का जिक्र करना होगा और उन खातों का ब्योरा भी देना होगा, जिनमें रकम ट्रांसफर की गई है।
बता दें कि एनजीओ की याचिका पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। एनजीओ ने बॉन्ड की वैधता को चुनौती देते हुए उसे रद्द करने या फिर चंदे की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की थी।
सरकार का अपनी ढपली अपना राग:
सरकार जहां चुनावी बॉन्ड देने वालों की गोपनीयता को बनाए रखना चाहती है। जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि पारदर्शिता बनाये रखने के लिए डोनर्स के नाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
केंद्र सरकार ने अपनी दलील देते हुए कहा कि चुनावी बॉन्ड योजना की शुरुआत राजनीति में काले धन को समाप्त करने के लिए की गई थी. डोनर्स की गोपनीयता को लेकर कई कारण गिनाते हुए इसे जरूरी माना. जैसे दूसरी राजनीतिक पार्टी अथवा संगठन के जीतने की सूरत में किसी कंपनी पर प्रतिघात का भय होना।
कांग्रेस का राफेल बना फिर हथियार:
उधर चुनावी घमासान के बीच राफेल पर बुधवार के उच्चतम न्यायालय के निर्णय से कांग्रेस को भाजपा के खिलाफ एक आक्रामक हथियार मिल गया है। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी का मोदी के खिलाफ राफेल का जो मुद्दा चुनाव आते आते फीका पड़ता दिखाई पड़ रहा था आज उसे फिर से संजीवनी मिल गई है।
कांग्रेस इसे भ्रष्टचार के मुद्दे पर अपने लिए जहां एक बड़ा हथियार मान रही है वहीं उसे लग रहा है कि भाजपा और मोदी को अब इस पर जवाब देना मुश्किल हो जाएगा।
बता दें कि बालाकोट एअर स्ट्राइक के बाद राहुल गांधी के राफेल मुद्दे की धार कम होने लगी थी और वक्त की नजाकत समझते हुए कांग्रेस नेता भी इस पर जोर देने की वजाय गरीबी, रोजगार, किसान व महिलाओं की स्थिति जैसे मूलभूत मुद्दों पर पर जोर दे रहे थे लेकिन आज न्यायालय के निर्णय के बाद से पार्टी ने फिर से मोदी को घेरने के लिए इस मुद्दे को जोर शोर से उछालने की तैयारी कर ली है।
कांग्रेस निर्णय को चुनाव में किस तरह भुनाएगी इसका संदेश तभी चला गया जब निर्णय आते ही राहुल गांधी समेत पूरी कांग्रेस मोदी पर आक्रमक हो उठी। कांग्रेस मान रही है कि आज के निर्णय के बाद राहुल गांधी द्वारा राफेल सौदे में भ्रष्टाचार के आरोपों को नई ताकत मिली है।
पार्टी का मानना है कि कल तक सुप्रीम कोर्ट से क्लीन चिट मिलने की बात कहकर पूरी भाजपा जिस तरह से राफेल सौदे पर उठाए जा रहे सवालों को खारिज कर रही थी अब उसके लिए इस पर जवाब देना आसान नहीं होगा। कांग्रेस नेता कह रहे हैं कि राहुल गांधी के चौकीदार चोर के आरोप से बचना अब मोदी और उनके साथियों के लिए आसान नहीं होगा।
गौरतलब है कि 14 दिसम्बर को उच्चतम न्यायालय के फैसले से राहुल गांधी के आरोपों को बड़ा झटका लगा था और तब उनके आरोपों की गंभीरता को लेकर सवाल उठना शुरू हो गए थे। कांग्रेस ने आज के फैसले को सत्य की जीत करार देते हुए इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने का संकेत दे दिया है।






