नेताओं ने किया घर-घर जनसंपर्क से परहेज
इंटरनेट की दुनिया में अब चुनाव प्रचार की कौन मगजमारी करे, जब चुनाव प्रचार के सारे विकल्प इसी पर मौजूद हैं चाहे वह लाइव फेसबुक का मामला हो या लाइव कनेक्टविटी का या फिर अन्य कोई माध्यम! अब घर-घर जनसंपर्क करने में जनता के बीच पहुंचने की बड़ी चुनौती का सामना कर रहे उम्मीदवारों को सोशल मीडिया का बड़ा सहारा मिला है।
बता दें कि 2004 के लोक सभा चुनाव में भाजपा के लिए सोशल मीडिया चुनाव प्रचार का बड़ा प्लेटफार्म बनकर उभरा था। खास तौर पर मोदी लहर बनाने में सोशल मीडिया ने एक बड़ा और प्रभावी रोल अदा किया था। सोशल मीडिया पर पिछले कुछ वर्षो तक देश के प्रधानमंत्री मोदी ने एकछत्र राज किया। भाजपा और मोदी को मिली लगातार सफलताओं के बाद तमाम नेताओं ने सोशल मीडिया की राह पर चलने को खुद को तैयार कर लिया। अन्य नेताओं की क्या कहें, स्वयं बसपा राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती तक की ट्विटर पर इंट्री हो गयी है।

इस बार लोकसभा चुनाव 2019 का आगाज होते ही प्रत्याशियों की सक्रियता सोशल मीडिया पर भी बढ़ गयी। अब तो सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से चुनाव प्रचार चल रहा है। प्रमुख राजनीतिक दलों से लेकर निर्दलीय प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्स एप जैसे सोशल मीडिया मंचों पर भी प्रचार तेज कर दिया है। यही वजह है कि राजनीतिक दल के प्रत्याशी से लेकर निर्दलीय और उनके समर्थक भी सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गए हैं। लोग पक्ष और विपक्ष पर जमकर भड़ास निकाल रहे हैं।
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों या उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ या फिर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, सभी सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने भी अब ट्विटर पर भी दस्तक दे दी है। मायावती के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर फॉलोअर्स की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे हालात में भाजपा और कांग्रेस के नेता तो फील्ड में दिख रहे हैं, पर सपा और बसपा पूरी राजनीति ड्राइंगरूम से ही सोशल मीडिया के सहारे चला रही है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश की कमान संभालने के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी तीसरी बार यूपी के दौरे पर हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर वह केंद्र और राज्य सरकार के कामकाज को लेकर आरोपों का हमला करने से नहीं चूक रही हैं।





