विरोध के लिए नैतिक आधार अपरिहार्य

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री
बचपन में चाय बेचने से लेकर प्रधानमंत्री बनने तक नरेंद्र मोदी ने अनेक उतार चढ़ाव देखे। उनसे असहमत हुआ जा सकता है। उनका विरोध करने वालो की भी कमी नही। यह सही कहा जाता है दशकों तक इतना तीखा विरोध देश में आज तक किसी भी नेता को झेलना नही पड़ा। लेकिन कुछ तो खास है जो उन्हें इन विरोधियों से अलग करता है। जब वह मुख्यमंत्री थे तब गुजरात के सर्वाधिक लोकप्रिय व विश्वसनीय नेता रहे। आज यही स्थिति उनके लिए राष्ट्रीय स्तर पर है। कोई अकेला नेता उनकी बराबरी नही कर सकता।
यह विश्वास उन्होने अपने आचरण से अर्जित किया है। वह राष्ट्रधर्म की भावना से प्रेरित होकर सार्वजनिक जीवन में आए। इसके साथ ही परिवार और निजी ही लाभ के विचार त्याग दिया। राष्ट्र और समाज के लिए समर्पित हो गए।
डा. विन्देश्वरी पाठक की किताब “नरेंद्र दामोदरदास मोदीः दी मेकिंग ऑफ़ लीजेंड“में इन्ही बातो की विस्तार से चर्चा है। इसमें मोदी की जीवनी का उल्लेख है। नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इस किताब का विमोचन किया। इसमें नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक प्रसंग है।
नरेंद्र मोदी बिना थके,बिना अवकाश लिए राष्ट्र कार्य में लगे रहते है। लेकिन इससे देश के अन्य लोगो की जिम्मेदारी कम नही हो जाती।सभी को देश व समाज के लिए कार्य करने की प्रेरणा लेनी चाहिए। राष्ट्रधर्म का विचार होगा तो व्यक्ति चाहे जिस क्षेत्र में हो अच्छा कार्य करेगा।

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