खाद की सब्सिडी को सीधे किसान के खाते में भेजने को लेकर कई तरह की मुश्किलों को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है
नई दिल्ली, 27 फरवरी। अब किसानों को उनके आधार कार्ड पर खाद मिलेगी। यह योजना पहली मार्च से पूरे देश में लागू हो जाएगी। इससे जहां खाद की चोरी रुकेगी और किसानों को उनकी जरूरत भर खाद की आपूर्ति होगी, वहीं सरकारी खजाने को लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की सीधी बचत होने का अनुमान है। सब्सिडी के भुगतान का तरीका भी बदल दिया है। केंद्रीय उर्वरक मंत्रालय में अपर सचिव धर्मपाल का कहना है कहा कि बदली हुई व्यवस्था में खाद कंपनियों को उत्पादन पर सब्सिडी देने के बजाय किसानों को होने वाली असल आपूर्ति के आधार पर दी जाएगी। किसानों को खाद खरीदने के लिए पहचान के तौर पर आधार कार्ड देना जरूरी होगा।

फिलहाल किसानों की सहूलियत के लिए आधार कार्ड न होने पर किसान क्रेडिट कार्ड और वोटर कार्ड दिखाने पर भी खाद मिल जाएगी। किसान के खाद खरीदने के बाद ही कंपनी के खाते में उतनी सब्सिडी की राशि मिल पाएगी। लेकिन यह व्यवस्था रसोई गैस से थोड़ी अलग होगी। खाद की सब्सिडी को सीधे किसान के खाते में भेजने को लेकर कई तरह की मुश्किलों को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। दरअसल, किसान की उचित परिभाषा और किसानों को उसकी खेती के लिए खाद की जरूरतों को तय करने का कोई सर्वमान्य मानक नहीं है। लिहाजा इसमें किसानों को पूरी छूट दी है। बाद में चलकर आधार नंबर के साथ किसान के खेत का रकबा व सॉइल हेल्थ कार्ड में दी गई सलाह के अनुरूप ही खाद की आपूर्ति की जा सकती है।
देश में ढाई लाख से अधिक खाद बिक्री करने वाली दुकानों पर ‘प्वाइंट ऑफ सेल’ (पीओएस) मशीनें लगाकर दुकानदारों को प्रशिक्षण दे दिया है। धर्मपाल ने कहा कि इस नई प्रणाली से खाद कंपनियों के बीच खाद बेचने को लेकर कड़ी प्रतिस्पर्धा होनी तय है। खाद खरीदते समय किसानों को उनकी जमीन और फसल विशेष के लिए खाद की जरूरत का ब्योरा भी दिया जाएगा। इसके आधार पर वह खाद की खरीद कर सकता है। दूरदराज के क्षेत्रों में खाद की आपूर्ति के लिए पीओएस मशीनों की कनेक्टिविटी एक गंभीर चुनौती बन सकती है। लेकिन इसके लिए मशीनों में अतिरिक्त एंटीना की व्यवस्था की है।
देश में फिलहाल कुल 2.42 करोड़ टन यूरिया की जरूरत होती है, जिसमें 55 लाख टन यूरिया का आयात करना पड़ता है। इसी तरह मिश्रित खाद में 1.23 करोड़ टन खाद की जरूरत पड़ रही है, जिसमें से 86 लाख टन खाद आयातित होती है। घरेलू उत्पादन कम है। हालांकि घरेलू उत्पादन को देखते हुए लगता है कि जल्दी ही यूरिया का आयात और घट सकता है या बंद भी हो जाए। जबकि कुल 75 हजार करोड़ रु की खाद सब्सिडी दी जा रही है। इसमें 30 फीसद तक की बचत हो सकती है।







