चौदह सालों से इस शख्स की दबंगई के आगे सरकारें नतमस्तक!

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शाहिद अली पर आरोप: कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में फर्जी नियुक्ति और धोखाधड़ी के दम पर पा रखा है एक अहम् पद
नई दिल्ली, 01 अगस्त 2019: ‘समरथ् को नहीं दोष गोसाई’ तुलसीदास जी की यह पंक्तियाँ आज भी समीचीन हैं। यहाँ रायपुर के कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में एक प्रोफेसर पर आरोप है कि वो अपने फर्जी प्रमाणपत्रों के दम पर प्रोफेसर बना बैठा है। उस पर बिलासपुर हाईकोर्ट में केस भी चल रहा है। फिर भी शिक्षा के मंदिर में वो अहम् पद पर है। ऐसे चरित्र पर छात्रों को क्या सीख मिलेगी? यह नीति-नियंता तय करने वाली सरकारें ही जानें?
बता दें कि ऊँची पहुँच के कारण कोई आँच न आना ये स्वाभाविक है पर क्या नीति-नियम के अनुसार क्या यह सही है उपयुक्त है? अगर हाँ! तो सब क्यों न इसी को आदर्श मानकर इसी राह को इख्तियार करें। सरकारें बदलीं पर शाहिद अली का रसूख कम नहीं हुआ बढ़ता ही गया।
शाहिद अली पर अदालत में धारा 420, 467, 468, 471 और 34 भा.द.स के तहत दंडनीय अपराध के केेेस हैं दर्ज:
छत्तीसगढ़ प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने विपक्ष में रहते हुए कहा था कि कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विवि में जितनी भी फर्जी नियुक्तियां हुईं हैं उन पर कार्रवाई करेगी। लेकिन सरकार बनने के 6 महीने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। वहीं विवि के एसोसिएट प्रोफेसर और जनसंचार विभाग के एचओडी डॉ.शाहिद अली पर फर्जी नियुक्ति और धोखधड़ी के गंभीर आरोप हैं। उन पर अदालत में धारा 420, 467, 468, 471 और 34 भादस के तहत दंडनीय अपराध के केेेस दर्ज हैं। पूर्व में उनके खिलाफ गिरफ्तारी के वारंट भी जारी हो चुका है। लेकिन विवि प्रशासन और सरकार इस मामले पर खामोश है।
सरकार बदलते ही पासा पलटा:
छात्रों का आरोप है कि शाहिद अली ने सरकार बदलते ही पासा पलट लिया और कांग्रेस का गुणगान करने लगे। शायद यही वजह है कि उनपर कार्रवाई नहीं हो रही है। डॉ, शाहिद अली पर फ़र्जी डिग्री के सहारे नौकरी पाने का आरोप है। जानकारी के अनुसार 2005 में कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में शैक्षणिक पदों के साथ रीडर पद की संविदा नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया था। इसके लिए पत्रकारिता में स्नातकोत्तर उपाधि, पीएचडी या 8 वर्ष शैक्षणिक अध्यापन या पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्ष का अनुभव जरूरी था। डॉ.शाहिद अली, अपनी पत्नी गोपा बागची के माध्यम से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र बनाकर रीडर के पद पर भर्ती हो गए और 2008 में रीडर के पद पर नियमित हो गए।
जिसके बाद भिलाई के शैलेन्द्र खंडेलवाल ने आदालत में चुनौती दी। अदालत ने केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर से पूछा की क्या डॉ. अली को जारी किए गए प्रमाण पत्र सही हैं और यह प्रमाणपत्र विश्वविद्यालय प्रशासन ने ही जारी किया है, इस पर गुरु घासीदास विश्वविद्यालय प्रशासन ने लिखित में जानकारी देते हुए कहा कि डॉ .शाहिद अली ने कभी भी गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, बिलासपुर में शिक्षक के पद पर अस्थायी या स्थायी तौर पर कार्य नहीं किया है। अतः डॉ. शाहिद अली की पत्नी और गुरु घासीदास विश्वविद्यालय की जनसंचार विभाग की एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ .गोपा बागची द्वारा प्रदान की गयी अनुभव प्रमाण पत्र पूरी तरह से फर्जी है। जिसके आधार पर अदालत ने डॉ. शाहिद अली के प्रमाण पत्रों को फर्जी मानते हुए धोखाधड़ी का प्रकरण पंजीबद्ध धारा 420, 467, 468, 471 और 34 भादस के तहत दंडनीय अपराध का मामला दर्ज किया।
इसके साथ ही शैलेन्द्र खंडेलवाल द्वारा किये गये शिकायतों के आधार पर तत्कालीन सामान्य प्रशासन की सचिव निधि छिब्बर ने भी अपने जाँच में पाया कि डॉ.शाहिद अली की नियुक्ति में प्रक्रिया में UGC के मापदंडों का पालन नहीं किया गया है। अब सवाल यह है कि सरकार के गठन के 6 महीने के बाद भी शाहिद अली पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है। चुनाव से पहले किये अपने वादों पर कांग्रेस खामोश क्यों है।
ऐसे ही एक केस में एमपी में कार्रवाई तो छत्तीसगढ़ में क्यों नहीं?
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में आर्थिक अनियमितताओं के मामले में आरोपी पूर्व कुलपति प्रो. बीके  कुठियाला 20 दिन से पंचकूला से लापता हैं। उनकी पत्नी भी उनके साथ ही हैं। इस बीच उन्होंने किसी से संपर्क भी नहीं किया है। प्रो. कुठियाला बीमारी के चलते अवकाश पर हैं। इधर, जांच एजेंसी ने हरियाणा सरकार को उनके खिलाफ की गई एफआईआर और गिरफ्तारी वारंट की जानकारी भेज दी गयी है। उनकी तलाश में दो टीम भेजी गई हैं।
प्रो. कुठियाला हिमाचल प्रदेश के ग्राम प्रागपुर के रहने वाले हैं। उनकी तलाश में प्रागपुर पहुंची ईओडब्ल्यू की टीम को जानकारी मिली कि कुठियाला करीब 50 साल पहले ही प्रागपुर छोड़ चुके हैं। उनके परिवार का वहां अब कोई नहीं रहता है। प्रो. कुठियाला हरियाणा उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष हैं। उनके विभाग को ईओडब्ल्यू ने एफआईआर और गिरफ्तारी वारंट की जानकारी दे दी है।

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