पानी के लिए आपसी संघर्ष में मरे 15 बंदर, क्या वाकई किसी बड़े ‘जल संकट’ की ओर इशारा करते हैं?

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पानी बचाएं जीवन बचाएं

नई दिल्ली, 09 जून 2019: मध्य प्रदेश के देवास जिले से एक खबर तेजी से वायरल हो रही है। जिसे पढ़कर आने वाले समय में पानी संकट की भयावहता को बहुत करीब से महसूस किया जा सकता है

खबर थी कि वन क्षेत्र में 15 बन्दर मरे पाए गए और इनकी मौत भीषण गर्मी में पानी के अभाव में प्यास के चलते हुई। मृत बन्दर काले मुंह के थे जो शायद उनके लंगूर प्रजाति के होने की ओर इशारा करता है।

जहां बंदर मरे पाए गए वहां से थोड़ी दूर पर एक जल स्त्रोत है जिस में पानी निरंतर कम होता जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से बताया गया कि 60-70 शारीरिक रूप से तगड़े बंदरों के एक समूह ने इस जल स्त्रोत को अपने घेरे में ले रखा है और बन्दरों का कोई और समूह या टोली अगर पानी पीने की कोशिश करती है तो रखवाली कर रहे बन्दर अपनी ताकत के दम पर उन्हें भगा देते हैं।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि भीषण गर्मी में पानी न मिल पाने के कारण इन 15 बंदरों की मौत हुई है। खबर पढ़ने के बाद यह सोचना स्वाभाविक था कि अगर जीव जंतु पानी को लेकर इस हद तक आधिपत्य की भावना से घिर चुके हैं तो कल मानव इन्ही हालात में क्या करेगा। कैसा होगा वह दृश्य और क्या होगा परिणाम ?

मध्य प्रदेश के देवास में पानी के लिए आपसी संघर्ष के दौरान 15 बंदर मारे गए। यह बात हम इंसानों को गहराई से समझनी होगी। बंदर मानव प्रजाति के गुण-धर्म के काफी करीब हैं। कहते हैं कि तीसरा विश्वयुद्ध पानी के लिए लड़ा जाएगा।

आइये संकल्प लें कि हम एक बूंद पानी भी जाया नहीं करेंगे और अगर जल संचयन में कोई योगदान दे सकें तो क्या ही बात होगी।

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