डॉ दिलीप अग्निहोत्री
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में दो बार शब्दों की बाजीगरी दिखाई। लेकिन यह अमान्य हुआ, अंततः तीसरी बार उन्हें चौकीदार को चोर बताने के लिए स्पष्ट शब्दों में माफी मांगनी पड़ी। इसके बाबजूद भी राहुल गांधी में सुधार नहीं दिखाई दिया। उन्होंने अपरोक्ष रूप से जनता पर ही तोहमत मढ़ दी। उन्होंने कहा कि चौकीदार चोर का नारा जनता ने दिया था। यह कह कर राहुल ने अपना तो बचाव किया, लेकिन जनता को दोषी बताने का प्रयास किया। जबकि यह जगजाहिर है कि चौकीदार चोर शब्द की तुकबंदी राहुल ने स्वयं की थी, वह इसके सूत्रधार थे, वही जनसभा में नारे लगवाते थे।उनकी पार्टी के कार्यकर्ता नारा बुलंद करते थे। चुनाव परिणाम चाहे जो हों ,लेकिन इसमें संदेह नहीं कि नरेंद्र मोदी की जनता के बीच विश्वसनीयता राहुल गांधी से अधिक है। इस बात को अन्य विपक्षी पार्टियों ने भी समझा है। शायद यही कारण है कि चौकीदार चोर चिल्लाने में राहुल गांधी अकेले है, उन्हें अन्य विपक्षी पार्टियों का इस मुद्दे पर साथ नहीं मिला है।
राहुल गांधी ने मुरैना की जनसभा में कहा कि चौकीदार चोर है का नारा उन्होंने नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की एक सभा में जनता ने दिया था। राहुल गांधी के इस कथन का साफ मतलब है कि चौकीदार शब्द के लिए वह दोषी नहीं है, यह छतीसगढ़ की जनता का दोष है, यह नारा यहां की जनता ने बनाया है, जिसे वह अपनी प्रत्येक जनसभा में दोहरा रहे है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट को यदि इस पर सजा देनी है, तो वह छतीसगढ़ की जनता को दी जाए।
राहुल गांधी यहीं नही रुके, उन्होंने भिंड में कहा कि चौकीदार ने चौतीस हजार करोड़ रुपये भिंड के युवाओं से छीने, चोरी किए और आपने वह पैसा चोर अनिल अंबानी के बैंक एकाउंट में डाला। ऐसा करने पर चौकीदार को कैसा लगा। दिल में कौन सी भावना पैदा हुई। राहुल गांधी का यह अंदाज छतीसगढ़ तक सीमित नहीं रहेगा। वह जहां भी जाएंगे , यह बताएंगे कि यही की जनता ने चौकीदार चोर का नारा दिया, और यहां के लोगों के जेब से चौतीस हजार करोड़ रुपये चुरा कर चौकीदार ने अनिल अंबानी की जेब में डाल दिया। वैसे कुछ समय पहले तक वह यह रकम तीस हजार करोड़ बता रहे थे।
अनिल अंबानी ने इस सम्बंध में राहुल गांधी को दो पत्र लिखे थे। उनका दावा है कि रिलायंस डसॉल्ट संयुक्त उपक्रम कोई राफेल जेट विमानों का विनिर्माण नहीं करने जा रहा है। सभी छत्तीस विमान शत प्रतिशत फ्रांस में ही तैयार किए जाएंगे। वहीं से भारत को निर्यात किया जाएगा। भारत के रक्षा मंत्रालय से रिलायंस समूह को इन विमानों के संबंध में कोई भी ठेका नहीं मिला है।
उनकी कंपनी की भूमिका केवल ऑफसेट अथवा निर्यात दायित्व तक सीमित है। इसमें भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन जैसे सरकरी संगठनों से लेकर सौ से अधिक की संख्या में कंपनियां शामिल होंगी। इससे भारत की विनिर्माण क्षमता का विस्तार होगा। यह ऑफसेट नीति कांग्रेस के नेतृत्ववाली संप्रग सरकार ने ही दो हजार पांच में लागू की थी। अंबानी द्वार रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में कदम रखने की घोषणा दिसंबर दो हजार चौदह में ही कर दी थी। उस समय यूपीए की सरकार थी। रिलायंस को इस सौदे से जो हजारों करोड़ रुपए का फायदा होने की बात की जा रही है वह भी झूठ है।
भारत सरकार के साथ कोई अनुबंध है ही नहीं। पत्र में कहा गया है कि लड़ाकू जेट की आपूर्ति करने वाली फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट ने रिलायंस समूह से करार अनुबंध के तहत अपनी ऑफसेट अनिवार्यता को पूरा करने के लिए किया है। रक्षा ऑफसेट के तहत विदेशी आपूर्तिकर्ता को उत्पाद के एक निश्चित प्रतिशत का विनिर्माण खरीद करने वाले देश में करना होता है। कई बार यह कार्य प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के जरिये किया जाता है।
राहुल गांधी को यह नहीं भूलना चाहिए कि उन्होंने चौकीदार चोर के लिए सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी है। राहुल ने अवमानना के मामले में पहले दायर किए गए दो हलफनामोंमें सिर्फ खेद जताया था। इस पर कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई थी। इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने शीर्ष अदालत से मौखिक रूप से माफी मांगी थी। इसके साथ ही नया हलफनामा दाखिल करने की मोहलत मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट राफेल पर सुनवाई के लिए तैयार था, इसी को राहुल ने अपनी धुन में निष्कर्ष निकाला लिया।
उन्होंने कहा था कि कोर्ट ने मान लिया कि चौकीदार ही चोर है। मीनाक्षी लेखी ने उनके खिलाफ अवमानना का याचिका की थी। इस पर कोर्ट ने राहुल को बिना नोटिस जारी किए ही जवाब मांगा था। पहले दो जबाबो में उन्होंने कहा था कि चुनावी जोश में यह शब्द निकल गया, इसका उन्हें खेद है। कोर्ट को बताया गया कि राहुल के खेद जताने को माफी मांगना नहीं कह सकते। उन्होंने कोर्ट का आदेश देखे बगैर पत्रकारों को गलत बयान दिया था। लेकिन जिस तरह खेद जताया गया है उसे माफी मांगना नहीं कहा जा सकता। राहुल की तरफ से जो हलफनामा दिया गया था, उसमें एक जगह खेद जताया है तो दूसरी जगह उसी बयान को उचित ठहराया था।
इसके लिए कोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई। दूसरा कोई रास्ता नहीं बचा, तब राहुल ने चौकीदार चोर पर बिना शर्त माफी मांगी है।
सुप्रीम कोर्ट किस निर्णय करता है, यह भविष्य में पता चलेगा। लेकिन यह प्रमाणित है कि राहुल गांधी राफेल मामले पर झूठ बोल रहे थे। कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंधवी जैसे लोगों ने भी उन्हें वास्तविकता नहीं बताई, उन्होंने राहुल को रोकने का प्रयास नहीं किया। इन्होंने यह नहीं बताया कि कोर्ट के हवाले से ऐसा बयान देना आपत्तिजनक व अवैधानिक है। इसके बाद इन्ही कांग्रेसी वकीलों ने राहुल से दो बार खेद व्यक्त कराया। वह जानते होंगे कि यह पैंतरा कोर्ट में नहीं चलेगा। इसके बाद राहुल को फटकार लगी।
राफेल में राहुल लगातार गलत बयानबाजी कर रहे है। फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति के बयान को उन्होंने गलत ढंग से पेश किया। अनिल अंबानी ने भी उन्हें गलत बताया है। कहा कि उनकी जेब में सरकार या नरेंद्र मोदी ने कोई पैसा नहीं डाला। छतीस विमान फ्रांस से बन कर भारत आएंगे। फिर राहुल ने सुप्रीम कोर्ट का नाम लेकर झूठ बोला, बिना शर्त माफी भी मांगनी पड़ी। अब कह रहे है कि हमने नहीं ,जनता ने चौकीदार चोर कहा था। इस तरह अपने बचाव के लिए राहुल ने जनता पर ठीकरा फोड़ दिया। राहुल का यह दांव भी उल्टा ही पड़ेगा, क्योकि उनके ताजा बयान से गेंद जनता के पाले में आ गई है। सुप्रीम कोर्ट विधिक आधार पर फैसला करेगा, लेकिन राहुल ने जनता पर तोहमत लगाई है, उसका जबाब चुनाव में मिल सकता है।







