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    तातापानी के गर्म जलस्रोतों का आखिर रहस्य क्या है?

    By August 2, 2019Updated:August 2, 2019 Hot issue No Comments5 Mins Read
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    छत्तीसगढ़ व ओड़िशा से लौटकर राहुल कुमार गुप्त की खास रपट

    नई दिल्ली, 02 अगस्त 2019: छ्तीसगढ़ के कई स्थल प्राकृतिक सौन्दर्य व रहस्यों से भरे हैं। रामायण काल का दण्डकारण्य का बड़ा हिस्सा छत्तीसगढ़ में ही है। यहाँ के बलरामपुर जिले के रामानुजगंज में तातापानी नामक प्राकृतिक स्थल सभी जीवों का मन मोहने वाला है। यह स्थल अंबिकापुर से 80 किलोमीटर की दूरी पर है। यहाँ के प्राकृतिक गर्म जल स्रोत हजारों सालों से मानवों के लिये हमेशा से कौतूहल का विषय रहा है, जो आज भी यथावत है।

    कहा जाता है कि यहाँ के लोग जो चीजें अपने पूर्वजों से सुनते आये हैं उसी पर उन्हें बेहद विश्वास करते हैं। यहाँ के कई ग्रामीणों से बात करने पर केवल एक ही बात सामने आयी। वह यह कि यहाँ के गर्मजल स्रोत रामायण कालीन हैं। यहाँ के ग्रामीण कहते हैं कि जब वनवास के दौरान माता सीता कड़ाही में घी डालकर उससे कुछ भोजन बना रही थीं तब रामच्योरा पर्वत से राम जी ने एक छोटा पत्थर चलाकर फेंका और वो सीधे कड़ाही पर जा गिरा, जिससे गर्म घी के छींटें जहाँ-जहाँ पड़ें वहाँ-वहाँ गर्म जलस्रोत के छोटे-बड़े कुण्ड बन गये। इन गर्म जलस्रोतों का जल यहाँ के लोग त्वचा के रोगों के लिये भी कालांतर से प्रयोग में लाते रहे हैं। इनका धार्मिक विश्वास इन्हें सुकून और राहत जरूर देता आ रहा है। यहाँ का बड़ा शिवमंदिर और यहाँ की जमीन से निकली मूर्तियां भी लोगों के आकर्षण का केंद्र हैं। खास बात यह कि यहाँ का गर्म पानी हजारों सालों से हर मौसम में एक ही लय में है।

    कुण्डों के जल से सल्फर की गन्ध आती है। ऐसी मान्यता है कि इन जल कुंडों में स्नान करने व पानी पीने से अनेक चर्म रोग ठीक हो जाते हैं। इन दुर्लभ जल कुंडों को देखने के लिये वर्ष भर पर्यटक आते रहते हैं। यहाँ थोड़ा रोचकता के लिये अपने साथ लाये खाद्य सामग्री को कपड़े में बाँधकर पकाते हैं।

    हमारे ऋषि-मुनियों व पूर्वजों ने लगभग सभी हितकारी चीजों को धर्म से भी जोड़कर रखा है। महान शिक्षाविद् व भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति डाॅक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने भी अपने संपूर्ण अनुभव से यह बताया था कि धर्म और विज्ञान एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। तातापानी के गर्म जलस्रोतों का एक पहलू तो लगभग आपके सामने है।

    दूसरे पहलू के लिये हमने वहाँ के संत गरिहा गुरू विश्वविद्यालय सरगुजा के पर्यावरण विभाग के अध्यक्ष प्रो. मधुर मोहन रंगा से मोबाईल से बातचीत की जिससे काफी जानकारियाँ दूसरे पहलू (विज्ञान) के लिये एकत्रित हुईं। बता दें कि इन गर्म जल स्रोतों के रहस्यों के बारे में प्रोफेसर रंगा जी ने कई जानकारियाँ दीं।

    भूतापीय ऊर्जा के कारण कई जगह गर्म जलस्रोत के कुण्ड बने: प्रोफेसर रंगा

    भूतापीय ऊर्जा के कारण पृथ्वी में कई जगह गर्म जलस्रोत के कुण्ड पाये जाते हैं। जियो थर्मल एनर्जी पृथ्वी की सतह पर और अन्दर बनती है। तातापानी के सतह के अन्दर एल्यूमिनियम, सिलिकॉन, कैल्शियम, सोडियम, मैग्नीशियम, सल्फर हाइड्रोजन के तत्व हैं। यह बातें मुलाकात के दौरान पर्यावरण विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. मधुर मोहन रंगा ने कहीं। उन्होंने बताया कि पृथ्वी के ताप से ऊर्जा का निर्माण होता है। पृथ्वी सतह से जितना नीचे जाएंगे, तापमान बढ़ता ही जाएगा। सतह के नीचे की गर्मी से मेटल के पिघलने से मैग्मा बनेगा। प्रोफेसर रंगा ने बताया कि मैग्मा पिघलने का कारण रेडियो एक्टिव तत्व हैंं। रेडियो एक्टिव तत्वों में टाइटेनियम, यूरेनियम और पोटेशियम मैग्मा रॉक को गर्म करते हैं। आग्नेय रॉक गर्म हो जाता है।

    उन्होंने बताया कि तातापानी के क्षेत्र में वर्षा का पानी जब नीचे रिसकर जाता है तो गर्म हो जाता है। मैग्मा रॉक की गर्मी से गर्म हुआ पानी जियो थर्मल एनर्जी बनाता है। जियो थर्मल एनर्जी द्वारा ही जलस्रोत से गर्म पानी बाहर निकलता है। प्रो. रंगा ने बताया कि भूकम्प प्रभावी क्षेत्रों में ऐसा अक्सर मिलता है। जमीन के अंदर कार्बन के तत्व और हाइड्रोजन गैस ऑक्सीजन से मिल कर पानी के रूप में परिवर्तित हो जाते हैं। यह पानी भी गर्म होने के साथ ही जियो थर्मल एनर्जी के रूप में बाहर निकलता है। जियो थर्मल ग्रेडिएंड के कारण पानी डिस्चार्ज हो कर ऊपर आएगा। उन्होंने बताया कि सल्फर मैग्मा का ही भाग है। सल्फेट आयरन, पोटेशियम क्लोराइड चिकित्सा के काम में आता है।

    जियो थर्मल एनर्जी का यह हो सकता है उपयोग:

    भू तापीय ऊर्जा नवीनीकरण ऊर्जा का स्रोत है। जियो थर्मल एनर्जी से बिजली बनाई जा सकती है। बालनियोलॉजी के तहत गर्म जलस्रोत में मिनरल अधिक होने के कारण मिनरल बॉथ थेरेपी(स्नान चिकित्सा) हो सकती है। चिकित्सा के दौरान गर्म पानी की गुणवत्ता, तापमान चिकित्सक की सलाह पर उपयोग होगा। ऐसे गर्म जलस्रोतो से दर्द, ऐंठन, जोड़ों के दर्द को ठीक किया जा सकता है।

    भारत में लगभग 300 गर्म जल स्रोत:

    कई दशकों से भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग भू-तापीय ऊर्जा के अध्ययन तथा विकास कार्य में लगा हुआ है। भारत में अब तक लगभग 340 तापीय कुंडों अथवा झरनों की पहचान की जा चुकी है। छत्तीसगढ़ में तातापानी, हिमाचल में मणिकर्ण, लद्दाख में पुगा व छुमथंग, सोन-नर्मदा-तापी क्षेत्र में सालबरदी, पश्चिमी तटवर्ती क्षेत्र में कैम्बे द्रोणी, अंडमान-निकोबार में बैरन व नारकोंडम द्वीप आदि भारत के प्रमुख भू-तापीय ऊर्जा के स्रोत हैं।

    #तातापानी के गर्म जलस्रोत

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