नई दिल्ली 12 अक्टूबर 2018। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रेप के एक मामले की सुनवाई करते हुए 30 अगस्त को प्रदेश में फतवा जारी करने पर रोक लगा दी थी। हाईकोर्ट ने धार्मिक संस्थाओं, संगठनों, पंचायतों, स्थानीय पंचायतों और जन समूहों की ओर से फतवा जारी करने को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया था। इस संबंध में दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है, वहीं, याचिकाकर्ताओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगा दरअसल उत्तराखंड हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की पीठ ने यह प्रतिबंध हरिद्वार के एक गांव में नाबालिग से रेप के बाद जारी हुए फतवे के बाद लगाया था।
नाबालिग लड़की के दुष्कर्म के बाद गर्भवती होने और दबंगों के खिलाफ मुंह खोलने पर पंचायत ने पीड़िता को गांव से बाहर करने का फतवा जारी किया था। कोर्ट ने पंचायत के फतवे जारी करने को गंभीर मामला मानते हुए कहा कि पीड़िता के साथ सहानुभूति व्यक्त करने के बजाय परिवार को गांव से बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है।







