- 17 सालों बाद भी आरोपी पकड़ से बाहर
- प्रधानमंत्री ने दी शहीदों को श्रद्धांजलि
नई दिल्ली, 13 दिसम्बर 2018: भारत देश की संसद पर हुए आतंकी हमले के आज 17 साल हो गए लेकिन आज भी देश में आतंकी घटनाएं कम नहीं हुयी हैं वह जख्म आज भी हरे हैं। बता दें कि आज ही के दिन यानि 13 दिसम्बर 2001 को आंतकियों ने हमारे देश के संसद भवन पर हमला किया था। जिसमें नौ लोग मारे गये थे। आज दोनों सदनों में इस आतंकी हमले में मारे गये लोगों को श्रद्धांजलि दी गयी और उनके बलिदान को याद किया गया। शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन बृहस्पतिवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने पर लोकसभाध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने संसद हमले के शहीदों को याद किया और सदस्यों ने कुछ पल मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद ने रची थी साजिश:
मालूम हो कि संसद भवन पर हमला हुए 17 साल बीते गये। साल 2001 में आज ही के दिन यानी 13 दिसंबर को एनडीए शासनकाल में संसद पर आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद ने हमला किया था. संसद पर हुए हमले में 5 आतंकियों समेत 14 लोग मारे गए थे, जबकि 18 घायल हुए थे। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि ये आतंकी आज भी पाकिस्तान की पनाह में हैं।

लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कहा, ‘13 दिसंबर 2001 को हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के गौरव संसद भवन को आतंकवादी हमले में निशाना बनाया गया था। संसद परिसर की रक्षा में तैनात हमारे सतर्क एवं वीर सुरक्षा बलों ने इस कायरतापूर्ण हमले को विफल कर दिया।’ उन्होंने कहा, ‘‘आइए, हम आतंकवाद के इस अभिशाप से निपटने के लिए नए सिरे से प्रयास करने के अपने संकल्प को दोहराएं और अपनी मातृभूमि की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करने के लिए अपनी वचनबद्धता पूरी दृढ़ता से पुन: व्यक्त करें।
राज्यसभा ने भी संसद पर हमले के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति एम वेंकैया नायडू ने हमले का जिक्र करते हुए कहा ‘‘लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर पर हुए आतंकी हमले के दौरान नौ लोगों की जान गई थी। हम हर तरह के आतंकवाद की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं. हम एक बार फिर दोहराते हैं कि आतंकवाद को कदापि सहन नहीं किया जाएगा।’







