हृदय की जटिल सर्जरी कर मरीज को दिया नया जीवन

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चिकित्सा क्षेत्र में एराज ने फिर बनाया इतिहास 

लखनऊ, 19 फरवरी 2019: हृदय की गंभीर बीमारी से पीडि़त करन को एराज मेडिकल कालेज के विशेषज्ञों ने नया जीवन दिया। आयुष्मान मरीज करन की सर्जरी करने वाले डॉ. फजल करीम ने बताया कि मरीज के हृदय के वाल्व का एक पर्दा (साइनस ऑफ वाल्सलवा) फट गया था। इससे रक्त राइट एट्रिम में रिसने लगा था। डॉ. फजल के अनुसार यदि करन की सर्जरी जल्द न होती तो उसकी जान भी जा सकती थी।

एराज मेडिकल कालेज एण्ड हॉस्पिटल ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक बार फिर इतिहास रच दिया। अस्पताल में हृदय की जो जटिल सर्जरी की गयी वह देश के कुछ गिने चुने चिकित्सा संस्थानों में होती है। अस्पताल के कार्डियोसर्जन डॉ. फजल करीम व डॉ. इरशाद अहमद ने बताया कि मलिहाबाद निवासी रामचन्दर के बेटे करन(16) दो माह पूर्व गले में सूजन आ गयी। उन्होंने मलिहाबाद कसमण्डी के जिठाई गांव के स्थानीय चिकित्सक से दवा ली लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। राम चन्दर के अनुसार कुछ दिनों में ही करन को सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी जिसके बाद उसे माल के सरकारी अस्पताल में ले गये जहां चिकित्सकों ने मरीज को देखने के बाद उसे केजीएमयू व संजय गांधी पीजीआई ले जाने की सलाह दी।

हालांकि उन्होंने एराज मेडिकल कालेज जाने का फैसला लिया और यहां आ गए। करीब दस दिन पूर्व राम चन्दर बेटे को लेकर एराज मेडिकल कालेज के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. फजल के पास आए। एंजियोग्राफी में पता चला कि उसके हृदय के वाल्व का एक पर्दा(साइनस ऑफ वाल्सलवा) फट गया है। डॉ. फजन ने बताया कि इस बीमारी को चिकित्सीय भाषा में रप्चर साइनस ऑफ वाल्सलवा एन्यूरिज्म कहते हैं। इस रोग के दौरान दिल से निकलने वाली बड़ी नस(ऑरटा) के वाल्व का पर्दा फट जाता है। जिसके कारण खून हृदय की राइट एट्रिम में रिसने लगता है। ऐसे में जरूरी होता है कि उसे खूली हुई जगह को बद कर रक्त का रिसाव रोका जाए।

डॉ. फजल व डॉ. इरशाद अहमद ने एंजियोग्राफी में ही यह तय किया कि मरीज की ओपेन हार्ट सर्जरी करने के बाद एडीओ-1(एम्प्लाटज डक्ट अपलोडर) लगाकर छेद को बंद किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि यह एक 12 मिमी की डिवाइस थी जिसे छेद के स्थान पर लगा दिया गया। अगले 3-6 माह में हृदय में बनने वाला पदार्थ इस डिवाइस को पूरी तरह से ढक देगा और मरीज सामान्य रूप से अपना जीवन व्यतीत करेगा।

सर्जरी करने वाली टीम:
डॉ. फजल ने बताया कि यह एक प्रकार की जटिल सर्जरी थी। जिसके लिए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों को भी सहयोग के लिए आमंत्रित किया गया था। सर्जरी के डॉ. इरशाद अहमद के साथ एएमयू के डॉ. शाद अबकरी, डॉ. कामरान विशेष रूप से एराज मेडिकल कालेज आए थे। उसके अलावा संस्थान के डॉ. मुजाहिद(एजेस्थिसिया) व डॉ. खालिद ने भी सर्जरी में अपनी भूमिका अदा की।

निजी अस्पताल में खर्च होते 3 लाख से अधिक:
डॉ. फजल ने बताया कि रामचन्दर आयुष्मान योजना का लाभार्थी थी जिस कारण उसके बेटे की सर्जरी निशुल्क हुई हैं। हालांकि यह सर्जरी निजी चिकित्सा संस्थान में कराने पर मरीज को 3-3.5 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ सकते थे। सरकारी में भी मरीज को एक लाख के आस-पास खर्च करने होते जो एराज मेडिकल कालेज में मुफ्त हुई है।

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