मौसम के बदलने का क्रम एक बार फिर शुरू हो गया है। इस बार सर्दी की विदाई और गर्मी का आगमन हो रहा है। मौसम चाहे कोई भी हो, उसकी अपनी अलग खासियत होती ही है। जिस तरह सर्दी का मौसम आने से पहले तमाम तरह की तैयारियों और सावधानियों को सुनिश्चित करना आवश्यक था, उसी तरह गर्मी का मौसम अपने साथ अलग किस्म का माहौल लेकर आता है।
ध्यान रखना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि दो मौसमों की परिस्थितियों के बीच कोई सामंजस्य नहीं होता। तो, अब जब गर्मी का आगमन हो रहा है तब उसके लिए जो तैयारियां करनी हैं, वे अन्य बातों के अलावा स्वास्थ्य से अधिक जुड़ी हैं।

वैसे तो भूमंडलीय स्थिति अब कुछ ऐसी हो गई है जिसमें वैज्ञानिकों के अनुसार अब शायद गर्मी में भी पहले जैसी तेजी न रहे क्योंकि गर्मियां भी अब उतनी गर्म नहीं होंगी लेकिन यह अभी देखने की बात है। पहली बात तो यह कि गर्मी के मौसम में सर्दी के मुकाबले गतिविधियां अधिक बढ़ जाती हैं, इसलिये उससे जुड़ी चीजों की अधिकता भी सामने आती है।
उदाहरण के लिये सड़कों-बाजारों में उमड़ने वाली भीड़ को ही ले लीजिए। बड़े दिनों और गरम मौसम में लोग बाहर ज्यादा निकलते हैं। चाहे वह काम के लिये हो या मनोरंजन के लिए, रिफ्रेशमेंट के लिए हो। घरों के भीतर भी यही हाल होता है। काम बढ़ता है तो उससे जनित समस्याएं भी बढ़ती हैं। नतीजा अव्यवस्था और साफसफाई की समस्या के रूप में सामने आता है।
दूसरी और बड़ी मानी जाने वाली समस्या मच्छरों की होती है जिनकी शुरुआत हो चुकी है। शहर का इंतजाम देखने वाले प्रशासन एवं नगर निगम के लिए यह खासा सिरदर्द होता है। जिस तरह सर्दियों में अलाव जलवाने का काम होता है, उसी तरह गर्मियों में फॉगिंग की जरूरत होती है लेकिन दिक्कत सभी जगहों पर यह काम हो नहीं पाता। बीमारियों से सावधानी बरतना एक और जरूरत है।







