गुजरात में मोदी ने विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन किया और आधारशिला रखी
नई दिल्ली, 01 अक्टूबर 2018: मन की बात में कल रविवार को रेडियो पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारे सैनिक देश की शांति और प्रगति को नष्ट करने का प्रयास करने वालों को मुंहतोड़ जवाब देंगे। उन्होंने कहा कि भारत शांति में पूरा विश्वास करता है, लेकिन अपनी संप्रभुता और सम्मान के साथ किसी कीमत पर समझौता नहीं करेगा।
श्री मोदी ने यह टिप्पणी सर्जिकल स्ट्राइक की दूसरी वर्षगांठ ‘‘पराक्रम पर्व’ मनाए जाने के एक दिन बाद अपने 48वें रेडियो मासिक कार्यक्रम ‘‘मन की बात’ में की। उन्होंने कहा कि ‘आतंकवाद की आड़ में छद्म युद्ध का दुस्साहस करने के जवाब’ के रूप में सर्जिकल स्ट्राइक को याद करते हुए मोदी ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा, अब यह निर्णय लिया गया है कि हमारे सैनिक उन सभी को मुंहतोड़ जवाब देंगे, जो हमारे देश की शांति और प्रगति को नष्ट करने की कोशिश करेंगे।

सफलता की कहानी बना स्वच्छ भारत मिशन:
श्री मोदी ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन नियंत्रण स्तर पर सफलता की कहानी बन गया है। इस बात का उल्लेख करते हुए कि कैसे लोगों का एक छोटा सा कदम सबसे वंचित लोगों के जीवन में परिवर्तन ला सकता है, प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी के दर्शन और मंत्रों को अपनाने का आह्वान किया और लोगों से विशेष अवसरों पर खादी और हैंडलूम उत्पादों को खरीदने के लिए कहा।
मानवाधिकार आयोग की तारीफ :
प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की भी सराहना की। उन्होंने कहा, शोषित, पीड़ित और वंचित लोगों की स्वतंत्रता और शांति के लिए यह आवश्यक है और उनके लिए न्याय सुनिश्चित किया जाए। एनएचआरसी ने न केवल मानव अधिकारों की रक्षा की है बल्कि सालों से मानव गरिमा के प्रति सम्मान को भी बढ़ावा देता आ रहा है। मोदी ने कहा कि 12 अक्टूबर 1993 को गठित एनएचआरसी ने भारतीयों के बीच आशा और आत्मविश्वास को बढ़ाया है।
श्री मोदी ने समाज के शोषित, पीड़ित और वंचित लोगों को सामाजिक स्वतंत्रता, शांति और न्याय सुनिश्चित करने के लिए मानवाधिकारों पर जोर देते हुए कहा है कि यह ‘‘सबका साथ सबका विकास’ की अवधारणा का आधार है। उन्होंने कहा कि संस्कृत की एक उक्ति है‘‘न्यायमूलं स्वराज्यं अर्थात स्वराज के मूल में न्याय होता है, जब न्याय की चर्चा होती है, तो मानव अधिकार का भाव उसमें पूरी तरह से समाहित रहता है। शोषित, पीड़ित और वंचित जनों की स्वतनता, शांति और उन्हें न्याय सुनिश्चित कराने के लिए- ये विशेष रूप से अनिवार्य हैं।







