नवेद शिकोह
“अमित शाह के स्वास्थ्य लाभ की कामनाओं संग तमाम तरीकी बातें हो रही हैं। कोई कह रहा है कि शाह का स्वास्थ्य भारत की स्वस्थ और स्वच्छ राजनीति का इम्तिहान ले रहा है। माना कि भाजपा और कांग्रेस के बीच बेहद कड़वे रिश्ते हैं किन्तु भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को देखने के लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी अस्पताल पंहुचते हैं या नहीं!”
देश के सबसे बड़े राजनीति दल भाजपा के अध्यक्ष और भारतीय सियासत के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं और नयी दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में भर्ती हैं। देश के इस लाजवाब अस्पताल एम्स की मेडिकल टीम का इम्तिहान है कि वो भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की बीमारी को कितनी जल्दी काबू कर लेंगे। कितनी जल्दी अमित शाह पूरी स्वस्थ होकर लोकसभा चुनाव की तैयारी में सक्रिय हो जायेंगे उतने ही नंबरों से एम्स की मेडिकल टीम पास हो जायेगी। ये तो एम्स की मेडिकल टीम का इम्तिहान था लेकिन शाह का खराब स्वास्थ्य भारतीय राजनीत की भी परीक्षा ले रहा है।
स्वस्थ राजनीति में नीतिगत मुद्दों और विचारधारा की ही लड़ाई होती है व्यक्ति तौर से सब मित्र होते हैं। इस परिभाषा के तहत तो शाह का कुशलक्षेम लेने राहुल गांधी एम्स पहुंचेंगे या नहीं ! ये चर्चाएं हो रही हैं। इस बात में कोई शक नहीं कि यदि राहुल भाजपा अध्यक्ष को देखने जाते हैं या स्वस्थ होने की कामना करते हैं तो इससे राहुल गांधी का कद बढ़ेगा। ऐसे में लोग ना सिर्फ कांग्रेस अध्यक्ष की बल्कि भारत की स्वस्थ राजनीति की भी सराहना करेंगे।
इन बातों के सिवा शाह की बीमारी पर भी विरोधी अपनी अपनी गणित लगा रहे हैं। कोई कुछ कह रहा है तो कोई कुछ। ऐसी ही एक चर्चा में ये भी कहा जा रहा है कि भाजपा की हालत पतली है। पार्टी के अंदरूनी सर्वे में पता चल गया है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा बुरी तरह पिटने जा रही है। हार के ठाकरे से बचने के लिए पार्टी अध्यक्ष चुनाव की तैयारी के समय डेढ़ दो महीने बीमार रहें तो बाद में कहा जा सकता है कि पार्टी अध्यक्ष और तमाम चुनावी रणनीतिकार ऐन टाइम पर बीमार पड़ गये इसलिए हमें सफलता नहीं मिल सकी।






