.. तो क्या गलतफहमी में था समाजवादी का मुंहबोला भतीजा?

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नवेद शिकोह 
हर राजनीतिक हस्ती का सबसे बड़ा सपना प्रधानमंत्री बनना होता है। बड़े-बड़ों के ऐसे सपने हवा हो जाते हैं। बसपा सुप्रीमो का ये सपना हकीकत के करीब दिख रहा है। मायावती को इस बात का विश्वास हो सकता है कि मौजूदा सियासी समीकरण उन्हें प्रधानमंत्री का मजबूत दावेदार बना सकते हैं। यदि कांग्रेस के मुकाबले भाजपा विरोधी क्षेत्रीय दल आगे निकल आयें, कांग्रेस और तीसरी ताकतों (क्षेत्रीय दल) के नंबर भाजपा गठबंधन पर भारी पड़े तो बसपा सुप्रीमो मायावती प्रधानमंत्री बन भी सकती हैं। वो ऐसे सुनहरे तसव्वुर में डूबे ख्वाब देख रही हैं। उन्हें ये भी एहसास होने लगा होगा कि यदि में प्रधानमंत्री बन गयीं तो बसपा की क्षेत्रीय राजनीति की कमान कौन संभालेगा! यूपी के विधानसभा चुनाव में बसपा का मुख्यमंत्री दावेदार कौन होगा !
मुंह बोले भतीजे सपा अध्यक्ष इस चक्कर में थे कि बुआ प्रधानमंत्री बन जायें तो यूपी में क्षेत्रीय/जातिगत सियासत में उनका एकक्षत्र राज होगा। जातिगत राजनीति प्रधान उत्तर प्रदेश में उनकी इकलौती प्रतिद्वंद्वी भाजपा एंटीइंकम्बेंसी का शिकार हो जायेगी। सपा अध्यक्ष को शायद ये भी गुमान होगा कि अपनी पार्टी में वन मैन शो की तरह यूपी की सियासत और मुख्यमंत्री पद की दावेदारी में भी वो वन मैंन शो चलायेंगे। उम्मीद ये भी होगी कि लोकसभा में यदि सपा-बसपा गठबंधन बहुत सही साबित हुआ और यूपी- बिहार और बंगाल जैसे तमाम राज्यों में वो गोलबंदी करके बुआ जी को प्रधानमंत्री बनाने में सफल हो गये तो बुआ आगामी विधानसभा चुनाव में उन्हें सपा-बसपा का ज्वाइंट मुख्यमंत्री दावेदारी बनवा देंगी।
लेकिन अखिलेश यादव ने ऎसा सपना पूरी तरह देखा भी ना होगा कि बीच में ही आंख खुल गयी। उम्मीदों के आसमान पर आकाश नजर आया गया। साफ जाहिर होने लगा कि बुआ जी ने प्रधानमंत्री बनने के बीच बसपा की तरफ से यूपी के मुख्यमंत्री का दावेदार अपना सगा भतीजा आकाश चुना है मुंह बोला भतीजे अखिलेश यादव के लिए मैदान साफ नहीं किया है। भाई आनंद के बेटे आकाश को लेकर  बुआ ने ब्रांडिंग शुरु कर दी है। इतिहास गवाह है कि बसपा ने जिसे लेकर मीडिया पर हमला किया वो पार्टी में जबरदस्त उभरा। पार्टी भी सफलता की राह पर दौड़ने लगी।
कैडर को जोश आने लगा और जनाधार बढ़ने लगा। मीडिया मुनादी है। विरोधी है। दबे कुचलने को आगे नहीं बढ़ने देना नहीं चाहती। इतिहास गवाह है बसपा की इन सदाओं ने पार्टी को हर बार ऊंचाइयों पर पंहुचाया है। एक बार फिर मीडिया को लेकर आक्रामकता में ही बहन मायावती के भतीजे आकाश राजनीति के आसान पर सितारा बन कर दिखाई देने लगे हैं। हांलाकि ये सारी बातें राजनीति गतिविधियों में दिखने वाली संभावनाओं पर आधारित हैं।
बताया जाता है कि मौजूदा वक्त में भाजपा के खिलाफ दो ताकतें अपना वजूद कायम कर रही हैं। एक तरह कांग्रेस एकला चलो की तर्ज पर खुद को आगामी लोकसभा चुनाव के अखाड़े में उतरने की जबरदस्त तैयारी कर रही है। दूसरी तरह तीसरा मोर्चा नया रंग रूप ले रहा है। विश्वसनीय सूत्र बताते हैं कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मार्गदर्शन में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव तीसरा भाजपा विरोधी क्षेत्रीय दलों की एकता पर काम कर रहे है।
अभी फिलहाल यूपी- बिहार और पश्चिम बंगाल मिलकर तीसरे विकल्प को रंग रूप देने में लगे हैं। यदि लोकसभा नतीजे में भाजपा विरोधियों के नंबर भाजपा गठबंधन से ज्यादा आते हैं तो कांग्रेस या तीसरा मोर्चा का एक हो जाना तय है। कांग्रेस की सीटें ज्यादा रही तो तीसरा मोर्चा समर्थन करेगा और तीसरे मोर्चे की सीटें कांग्रेस से अधिक हुयीं तो उसे कांग्रेस समर्थन देगी। यानी गैर भाजपाई और गैर कांगेसी मोर्चा सवा सौ से अधिक सीटें भी ले आता है तो बसपा सुप्रीमो मायावती के प्रधानमंत्री बनने के आसार बन सकते हैं।

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