डिज़िटल मूविंग झांकी में श्याम चूड़ी बेचने आया…

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  • फोर्थ डे डिज़िटल मूविंग झांकी: न्यू गणेशगंज अमीनाबाद रोड लखनऊ
  • झांकी में दिखा लखनऊ के कलाकारों का आस्था से सराबोर कला का अद्भुत संगम
  • चार धाम द्वार लखनऊ के घनश्याम अग्रवाल की कतकतियां एलईडी पैनलों, रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगा उठा

लखनऊ,27 अगस्त 2019: डिज़िटल मूविंग झांकी में आज चौथे दिन श्री कृष्ण की मनमोहक मनिहारी रूप की झांकी प्रदर्शित की गयी। संयोजक ने जानकारी देते हुए बताया कि श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की डिजिटल मूविंग झांकियों को विगत एक माह से लखनऊ के विजय वर्मा व सहयोगी कलाकारों के कठिन परिश्रम से तैयार की गई है, खास बात यह कि थीम इस तरह तैयार की गयी है मानों मथुरा, वृदांवन, बरसाना यहीं पर बसा हो। बता दें कि श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर डिजिटल मूविंग झांकियों की प्रस्तुति मित्तल परिवार की ओर से न्यू गणेशगंज अमीनाबाद रोड लखनऊ में भव्य आयोजन के साथ की जा रही है।

झांकी संयोजक अनुपम मित्तल ने जानकारी देते हुए बताया कि श्रीकृष्णजी का मनिहारी रूप की झांकी में जब श्रीकृष्ण ने ब्रज को छोड़ दिया तो पूरा ब्रज सुनसान सा हो गया था क्योंकि ब्रज के कण- कण में श्रीकृष्ण का वास है। अपने माता पिता, मित्रगण, गायों, राधा, गोपियों की याद उन्हें सताती रहती थी तथा मिलने के लिए व्याकुल रहते थे। वे उद्धव से कहते है कि उन्हें आत्मा से श्री राधा प्रिय हैं, गोपियां उनकी आत्मा में रहती हैं। कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम से भरी है। उन्होंने तो श्रीकृष्ण के लिए तो लोक और परलोक दोनों छोड़ दिए है। वस्तुतः कृष्ण प्रेम के भूखे हैं। श्रीकृष्ण का मथुरा से ब्रज को लौटना इतना सरल भी नहीं था क्योंकि धर्म की स्थापना करना ही श्रीकृष्ण का ध्येय था। ये श्रीकृष्ण का ब्रज के प्रति प्रेम ही था कि वो स्वयं को रोक नहीं पाए और भेष बदलकर बरसाना पहुंच गए।

श्रीकृष्ण ने मनिहारी का रूप बनाया और कंधे पर रंग बिरंगी चूड़ियों के गुच्छे, सर पर टोकरी लिए चूड़ी बेचने बरसाना पहुंच गए। गांव में आवाज लगाकर रंग-बिरंगी चूड़ियां बेचने लगे। तभी वहां राधा और गोपियों के संग रंग-बिरंगी चूड़िया खरीदने आई। राधा और गोपियों को चूड़ी बेचते समय श्रीकृष्ण ने देखा कि सभी गोपियों का विवाह हो चुका है लेकिन वो सुहाग के रंग की चूड़ियां नहीं खरीद रही थी बल्कि काला और श्याम रंग की चूड़ियां खरीद रही थी। जब श्रीकृष्ण ने राधा और गोपियों से इसका कारण पूछा तो उन्होंने सहजता से उत्तर दिया कि हम लाल, हरी और पीली रंग की चूड़ियां नहीं पहनेंगे हमें तो श्याम रंग की चूड़ी ही भाती है। जब श्रीकृष्ण राधाजी को चूड़ी पहनाने के लिए उनके हाथ को स्पर्श करते हैं तो राधाजी को समझने देर नहीं लगती कि ये तो श्रीकृष्ण ही हैं जिन्होंने छलिया का रूप धरा हैं।

इसके साथ ही राधा कृष्ण का झूला, क्षीर सागर में शेषनाग पर लेटे हुए विष्णु व लक्ष्मी, 20 फुट ऊंचा शिवलिंग, अगस्त्य मुनि के मुख से जल अवतरण, राम दरबार, हनुमानजी के हदय से सियाराम के दर्शन, बंदर के संग करतब दिखाता मदारी की झांकी श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रही है। सैनिक वेशभूषा, नीले अश्व, धारा 370 हटाये जाने की खुशी में कश्मीर की पहाड़ियों के बीच लहराते तिरंगा, आग उगलते ड्रेगन के सेल्फी कार्नर भी बनाये गए है।

बुधवार 28 अगस्त को गोवर्धन लीला की झांकी तथा सांस्कृतिक संध्या में नृत्य एवं गायन प्रतियोगिता आयोजन किया जाएगा।

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