चौकीदार चपरासी है…!

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1926
नवेद शिकोह
ये दुर्भाग्य है कि चौकीदार चपरासी बन गया है और चपरासी चौकीदार हो गया है। दस-पंद्रह वर्षों से चौकीदार का स्वरूप बदल गया है। बेरोजगारी बढ़ी, सरकारी नौकरियां कम होती गयीं, प्राइवेट सैक्टर हावी होता गया। बढ़ते भ्रष्टाचार ने श्रम कानून, वेज बोर्ड और मजदूरों/कर्मचारियों के अधिकारों को अपने हाथ में ले लिए। बिना मानकों, नियम-कानूनों के तेजी से सिक्योरिटी एजेंसियां खुलने लगीं। स्टेटस सिंबल/झूठी शान के इस जमाने में बेरोजगारी चरम पर थी।
प्राईवेट आफिसेस को स्टेटस सिंबल के लिए सस्ते चौकीदार (सिक्युरिटी गार्ड) चाहिए थे। बेरोजगारों को रोजगार चाहिए था और कुकुरमुत्तों की तरह खुल रही सिक्युरिटी एजेंसियों को सिक्योरिटी गार्ड की भर्तियों के नाम पर सस्ते लेबर चाहिए थे। सिक्योरिटी एजेंसियों बढ़ रही थीं इसलिए इनके बीच प्रतिस्पर्धा भी बढ़ने लगी। एक एजेंसी छोटे छोटे आफिसेस को दस हजार रूपये महीने पर गार्ड (चौकीदार) दे रही थी तो दूसरी एजेंसी सात-आठ हजार रूपये महीने पर चौकीदारी मोहय्या कराने लगी। और जो चौकीदार (गार्ड) आफिसेस को सात हजार पर रखा जा रहा था उस चौकीदार को सिक्योरिटी एजेंसी अपनी बचत काटकर चार हजार रूपये वेतन दे रही थी।
गरीबी और बेरोजगारी का मारा बेरोजगार चार हजार रूपये पर ही  ऐसी चौकीदारी (गार्ड)की नौकरियां स्वीकार करने लगा। लेकिन इन चौकीदारों के साथ एक और जुल्म हुआ। हालात..मजबूरी..बेरोजगारी और.गरीबी के आगे मजबूर नये स्वरूप के ऐसे चौकीदारों के साथ एक और अन्याय हुआ। जिन आफिसों में ये ड्यूटी करते हैं वहां इनसे चौकीदारी कम और चपरासी का काम ज्यादा लिया जाता है। स्टेटस सिंबल के लिए छोटे छोटे आफिसों में इन्हें चौकीदारी के लिये सिक्युरिटी एजेंसियों से हायर किया जाता है लेकिन मुख्य काम चपरासीगीरी का लिया जाता है।
लेबर कानून के मुताबिक फुल टाइम चपरासी को भी आठ-दस हजार से कम वेतन नहीं मिलना चाहिए। इतना या इससे ज्यादा वेतन फुल टाइम गार्ड (चौकीदार) का भी बनता है। लेकिन आज बेरोजगारी का फायदा उठाकर चार हजार से सात हजार माह वेतन पर भर्ती बेरोजगारों से चौकीदारी और चपरासीगीरी दोनों ही करवायी  जा रही है।
वैसे ही जैसे राजनीतिक दल अपने नेताओं को संविधानिक पदों पर बैठाकर चुनाव प्रचार करवताते हैं। लगातार झूठ बुलवाती हैं। चोरियां करवाते हैं।
ये अच्छी बात है कि देश के मौजूदा प्रधानमंत्री ने खुद को चौकीदार कहकर चौकीदार पेशे का भी मान बढ़ाया। लेकिन दुर्भाग्य ये कि चौकीदारों के उक्त हालात की खबर नहीं ली। अब ये कहा जा रहा है कि देश का हर नागरिक चौकीदार है। यदि यही हालात रहे और बेरोजगारी अपने चरम पर रही तो सचमुच स्नातक, परास्नातक, बीएड, एम एड, एमसीए, एमबीए,आईटी एक्सपर्ट, इंजीनियर डाक्टर … सब के सब इसी तरह चार-पांच हजार रूपये माह वेतन पर चौकीदार कम चपरासी बन कर अंबानी-अडानी से लेकर छोटे-छोटे प्राइवेट आफिसों में चौकीदार बन जायेंगे। देश का हर नौजवान चौकीदार कम चपरासी बन जायेगा।
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