- वर्तमान दाखिल एआरआर पर उपभोक्ता परिषद ने फिर उठायी उंगली कहा बिजली कम्पनियां लगातार बदल रही हैं अपने उपभोक्ताओं की संख्या फिर एआरआर की सत्यता कैसे हो सिद्ध?
- बिजली कम्पनियों का परिचालन व अनुरक्षण खर्च आडिटेड लगभग 4200 करोड़ फिर इसे लगभग 9 हजार करोड़ प्रस्तावित कर गैप बढ़ाना नियमों के विपरीत
प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा जिस प्रकार से 2 दिन पूर्व गुपचुप तरीके से नियामक आयोग में पूर्व में दाखिल अपने वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) को बदल दिया गया और सबसे बड़ा चौकाने वाला मामला यह है कि वर्ष 2019-20 के एआरआर के सभी आंकड़ों में यह तीसरी बार बदलाव किया गया है। आश्चर्य की बात तो यह है कि वर्ष 2017-18 के ट्रूअप जो आडिटेड होता है उसमें भी बदलाव हो गया है। बिजली कम्पनियों के आडिटेड आंकड़ों में जहां सभी बिजली कम्पनियां अपना ओ एण्ड एम खर्च (परिचालन और अनुरक्षण) जो लगभग रू0 4200 करोड़ आ रहा है, उसे इस एआरआर में लगभग 9 हजार करोड़ प्रस्तावित किया गया है।
यह सब महज इसलिये किया गया है जिससे गैप बढ़ जाये और बिजली दरों में बढ़ोत्तरी सिद्ध की जा सके। जब बिजली कम्पनियों द्वारा अपने पूरे एआरआर में लगभग 1321 करोड़ की कमी की गयी, अपने गैप में भी लगभग 700 करोड़ की कमी की गयी। फिर ऐसे में श्रेणीवार बिजली दरों में बढ़ोत्तरी जो पूर्व में आयोग द्वारा प्रस्तावित किया गया था उसमें बदलाव न किया जाना। पूरी वर्तमान कार्यवाही नियमों के विपरीत है, जो यह सिद्ध करता है कि आयोग को इस संशोधित एआरआर को स्वीकार नहीं करना चाहिए। उपभोक्ता परिषद ने विद्युत नियामक आयोग से यह मांग की है कि जल्दबाजी में एआरआर को स्वीकार न किया जाये।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा हब तो तब हो गयी जब बिजली कम्पनियां कई बार प्रदेश में कुल विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या भी सही रूप से नहीं बता पायीं। वह भी अलग-अलग बताती रहीं। अब लगभग 2 करोड़ 70 लाख उपभोक्ता बता रही हैं। जिन बिजली कम्पनियों को यह न पता हो कि सही मायने में प्रदेश में कितने उपभोक्ता हैं उनका भार क्या है, फिर वह किस आधार पर एआरआर दाखिल कर रही हैं।
पहले बिजली कम्पनियां 3 करोड़ उपभोक्ता बताती रहीं, जब नियामक आयोग का डण्डा चला अब वह नीचे आ गयीं। लेकिन सबसे बड़ा चैंकाने वाला मामला यह है कि गरीब शहरी बीपीएल उपभोक्ता जिनकी बिजली दरों में लगभग 109 प्रतिशत की वृद्धि प्रस्तावित की गयी है, जो टैरिफ शाॅक की श्रेणी में आता है। अभी तक उसमें कोई भी बदलाव नहीं किया गया, इससे ऐसा सिद्ध हो रहा है कि बिजली आज भी अपने तरीके से आयोग को आंकड़े पेश कर रही हैं। ऐसे में नियामक आयोग जब तक पूरी सत्यता की जांच न कर ले तब तक इस वर्तमान दाखिल एआरआर को स्वीकार न करे।







