राजनाथ या गडकरी भी बन सकते हैं प्रधानमंत्री!

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  • 23 मई के बाद मोदी को घर में दूसरी जंग जीतनी होगी 
  • मोदी को दुबारा कुर्सीनशी होने के लिए घर के अंदर की जंग भी जीतनी होगी
नवेद शिकोह
“भाजपा को सरकार बनाने के लिए जोड़तोड़ करना पड़ा तो जरूरी नहीं की नमों पीएम बनें। गपशप को सही माने तो भाजपा की पुरानी अटल-आडवाणी और जोशी की लॉबी का कोई नेता प्रधानमंत्री पद की दावेदारी में सामने आ सकता है। पार्टी के अंदर की सुगबुगाहट को बाहर वाले मोदी विरोधी खूब हवा दे रहे हैं। इसलिए मोदी के दीवानों को भाजपा को पूर्ण बहुमत दिलाने की दीवानगी दिखानी होगी।”
ये जंग नहीं आसां, बस इतना समझ लीजिए-एक आग का दरिया है, और डूब के जाना है।
भारत के सबसे ज्यादा लोकप्रिय जन नेता नरेंद्र मोदी को दुबारा प्रधानमंत्री बनने के लिए दो बड़ी चुनौतियों का सामना करना है। बाहर वाली लड़ाई मुश्किल है तो घर वाली खामोश जंग भी आसान नहीं है। बहुमत नहीं मिला तो एनडीए की जोड़तोड़ की सरकार का प्रधानमंत्री मोदी के सिवा कोई और हो सकता है।
मोदी विरोधी भाजपा को हराने के प्लान ए के अलावा प्लान बी भी तैयार कर रहे हैं।
  ख्याली पुलाव हक़ीक़त बन जायें और एन डी ए बहुमत हासिल ना कर सके तो विपक्ष प्लान बी पर काम करेगा। भाजपा विरोधियों की चर्चाओं में ये बात निकल के आ रही है कि यदि बहुमत नहीं हासिल हुआ तो जोड़ तोड़ की सरकार में भाजपा का दूसरा खेमा नितिन गडकरी या राजनाथ सिंह को प्रधानमंत्री बनाना चाहेगा। समर्थन देने वाले गैर एनडीए दल राजनाथ सिंह या नितिन गडकरी को प्रधानमंत्री बनाने की शर्त रखेंगे।
 इसलिए प्लान बी के तहत भाजपा विरोधी भी राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी को भारी मतों से जिताने का प्रयास करेंगे।
चौराहों की चर्चाओं से लेकर सोशल मीडिया पर भी गपशप है कि अटल-आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी की तिकड़ी वाले भाजपा खेमें के सक्रिय नेता बड़ी दूरदर्शिता से अपने वर्चस्व की लड़ाई जीतने के लिए खामोशी से आपसी सामंजस्य बना रहे हैं। जिसके काउंटर में  नरेंद मोदी के विश्वसनीय प्रभावशाली खेमे वाले दूसरे खेमे के कद्दावर नेता राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी का कद कम करने की साजिश रच रहे हैं। आरोप लग रहे हैं कि मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने दो बार अली और बजरंगी जैसे विवादित बयान इसलिए दिये ताकि लखनऊ लोकसभा चुनाव के उम्मीदवार गृहमंत्री राजनाथ सिंह का शियों में मजबूत जनाधार खिसक जाये।
इसी तरह साधवी प्रज्ञा से भी शहीद हेमंत करकरे के खिलाफ बयान इसलिए दिलवाया गया ताकि महाराष्ट्र के मराठी वोटर के रुठने से नितिन गडकरी के जनाधार को नुकसान पंहुचे। ऐसी अप्रमाणित चर्चाओं के बीच मोदी विरोधी तब्के में राजनाथ सिंह और नितिन गडकरी जैसे आडवाणी टीम के नेताओं के प्रति सहानुभूति उमड़ पड़ी है। लखनऊ में मुसलमानों का एक तब्का.. रॉयल फैमिली और तमाम मोदी विरोधी भी राजनाथ का समर्थन कर सकते हैं। शियों के प्रमुख धार्मिक नेता मौलाना कल्बे जव्वाद ने पिछले लोकसभा चुनाव में राजनाथ सिंह को प्रधानमंत्री बनने की ख्वाहिश ज़ाहिर की थी।
भाजपा में दो गुटों में प्रतिस्पर्धा की अप्रमाणित चर्चाओं को सच मान लें तो नरेंद मोदी को चुनावी नतीजों के बाद घर की गुटबाजी को उभरने से रोकने के लिए पूर्ण बहुमत से जीतना जरूरी है। जोकि बड़ी चुनौती है।
मोदी को हराने के लिए सबसे ज्यादा अस्सी लोकसभा सीटों वाले सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश में एक दूसरे के धुर विरोधी दल सपा और बसपा मोदी को सराने के लिए एक हो हैं। पश्चिम बंगाल में ममता बेनर्जी का किला तोड़ना आसान नहीं। बिहार और अन्य प्रदेशों में कांग्रेस क्षेत्रीय दलों के सहारे भाजपा को चुनौती दे रही है। लेकिन देश की अधिकांश जनता का मोदी पर विश्वास विपक्ष की किलेबंदी पर भारी पड़ता दिख रहा है। प्रधानमंत्री की लोकप्रियता की आंधी में एंटीइंकमबेंसी भी हवा में उड़ती नजर आ रही है। फिर भी यदि एनडीए पूर्व बहुमत से नहीं जीतती तब जोड़तोडं की सरकार में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनने में मुश्किलें सामने आ सकती हैं।

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