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    भारत के पहले आधुनिक वैज्ञानिक: फादर ऑफ रेडियो साइंस जगदीश चंद्र बोस

    By November 30, 2019Updated:November 30, 2019 इंडिया No Comments3 Mins Read
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    जन्मदिवस विशेष: 30 नवंबर, 1858
     
    भारत के पहले आधुनिक वैज्ञानिक कहे जाने वाले जगदीश चंद्र बोस का जन्म 30 नवंबर, 1858 के दिन बंगाल के मेमनसिंह नाम के स्थान में हुआ था। वर्तमान समय मे यह जगह बांग्लादेश में है। आधिकारिक वेबसाइट (Britannica.com ) ब्रिटानिका.काॅम के अनुसार उनका परिवार भारतीय परंपराओं एवं संस्कृति काे मानने एवं अनुसरण करने वाला था।
     
    इनके पिता का ऐसा मानना था कि बोस को अंग्रेजी जैसी विदेशी भाषा के अध्ययन करने के स्थान पर सर्व प्रथम उन्हें अपनी मातृभाषा, बंगाली सीखनी चाहिए। लेकिन जगदीश चंद्र बोस को बचपन से वनस्पति एवं भाैतिक विज्ञान में अधिक रुचि होने के कारण उन्होंने ने कोलकाता में सेंट जेवियर्स स्कूल और उसके बाद कलकत्ता विश्वविद्यालय से भौतिकी शास्त्र में स्नातक की उपाधि हासिल करने के पश्यचात कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय (औमतौर पर केंब्रिज इंग्लैंड के कैम्ब्रिज शहर में स्थित एक विश्वविद्यालय है। यह अंग्रेजी भाषी देशों में दूसरा सबसे पुराना और यूरोप में चौथा सबसे पुराना विश्वविद्यालय है।) में दाखिला लिया और प्राकृतिक विज्ञान में बीएससी कर वर्ष 1884 में भारत वापस लौट आए। इसके बाद से जगदीश चंद्र बोस कलकत्ता के “प्रेसिडेंसी कॉलेज” में भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर नियुक्त हुए। जबकि वर्ष 1917 में जगदीश चंद्र बोस ने प्रोफेसर की नौकरी छोड़ दी। और शोध कार्य मे लग गये।
     
     
    वनस्पति विज्ञान के क्षेत्र में जगदीश चंद्र बोस ने कई सफल शाेध किए थे। लंदन में “रॉयल सोसाइटी” के केंद्रीय हॉल में कई प्रसिद्ध वैज्ञानिको के मध्य जगदीश चंद्र बोस ने एक शाेध के रूप में वनस्पति के टिश्यू पर सूक्ष्म तरंगों के प्रभावों को दिखाया। उनके इस प्रयोग ने यह साबित कर दिया कि समस्त वनस्पतियों के पेड़-पौधों में भी प्राण होते हैं और वे हम साधारण इंसानों की तरह ही सांस लेते हैं उनमें दर्द का भी अहसास होता है। उनके इस प्रयोग को देखकर समस्त वैज्ञानिक हतप्रद हो गए थे।
     
    यहां पर आप लोगों को एक जानकारी देंते हैं कि बोस ने वर्ष 1885 मे रेडियो तरंगों के संचार को बिना तार या अन्य किसी प्रकार के माध्यम के सहारा लिए ही प्रदर्शन किया था। इन्होंने रिमोट वायरलेस सिग्नलिंग के प्रयोग के साथ ही वायरलेस दूरसंचार को भी प्रराम्भ किया था। उन्होंने बेतार संकेत भेजने में असाधारण प्रगति की और सबसे पहले रेडियो संदेशों को पकड़ने के लिए अर्धचालकों का प्रयोग करना शुरु किया। लेकिन उन्होंने अपनी खोजों से व्यावसायिक लाभ उठाने के स्थान पर उसे सार्वजनिक रूप से प्रकाशित कर दिया ताकि अन्य शोधकर्त्ता इस पर आगे काम कर सकें। इसके पश्चात उन्होंने वनस्पति, जीव विज्ञान में अनेक तरह के खोजें की।
     
    इन्होंने एक यन्त्र “क्रेस्कोग्राफ” का भी आविष्कार करके इसके प्रयोग से विभिन्न उत्तेजकों के प्रति पौधों की प्रतिक्रियाओं का अध्ययन किया था। इस प्रयोग से उन्होंने यह सिद्ध कर दिया था कि वनस्पतियों एवं पशुओं के ऊतकों में बहुत समानता है। ये पेटेंट प्रक्रिया के बहुत विरोधी हुआ करते थे लेकिन उनके मित्रों के बहुत कहने पर इन्होंने एक पेटेंट के लिए आवेदन किया था। अभी हाल ही के वर्षों में आधुनिक विज्ञान को मिले इनके योगदानों को फिर मान्यता दी जा रही है।

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