बाबरी मस्जिद स्थल पर कोई समझौता मंजूर नहीं : अब्बास

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कुछ लोग इस मुद्दे पर फिजूल की बयानबाजी कर रहे हैं

लखनऊ, 06 मार्च। शिया वक्फ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर कहा कि इस पर किसी तरह के समझौते की गुंजाइश नहीं है। वहां पहले मस्जिद थी और मस्जिद ही बननी चाहिए। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को एक पत्र लिखकर 9 मस्जिदों को हिन्दुओं को सौंपने की बात कही थी।

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वसीम रिजवी के इस पत्र पर प्रतिक्रिया करते हुए शिया वक्फ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने कहा बाबरी मस्जिद को लेकर किसी भी तरह का समझौता बोर्ड को मंजूर नहीं है। हमें केवल सुप्रीम कोर्ट का ही फैसला स्वीकार है। मस्जिद अल्लाह का घर है और बोर्ड हमेशा से ही मस्जिद के पक्ष में रहा है। उन्होंने कहा रिजवी जैसे कुछ लोग इस मुद्दे पर फिजूल की बयानबाजी कर रहे हैं। वे लोग दोनों समुदायों के बीच दरार पैदा कर सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ना चाहते हैं।

आर्ट ऑफ़ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर की मध्यस्थता पर मौलाना यासूब ने कहा, उनकी मध्यस्थता का कोई मतलब नहीं है। वह मध्यस्थता के लिए गलत लोगों से मिल रहे हैं।

उन्होंने इस मामले में पक्षकारों से मुलाकात नहीं की है। मुझसे भी मिलने की बात हुई थी, लेकिन मैंने मन कर दिया। मैंने सुलह के फ़ॉर्मूले के बारे में जानना चाहा लेकिन, कोई ऐसा फ़ॉर्मूला है ही नहीं, सिर्फ मौखिक बात हो रही है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को एक पत्र लिखकर देश की नौ मस्जिदों को हिन्दुओं के हवाले करने को कहा था। पत्र में लिखा था देश में नौ मंदिरों को गिराकर ये मस्जिदें बनायी गई हैं। लिहाजा इन्हें हिन्दुओं को सौंप देना चाहिए।

वसीम रिजवी के पत्र पर प्रतिक्रिया करते हुए एआईएमपीएलबी के कार्यकारी सदस्य मौलाना खालिद राशीद फरंगीमहली ने कहा था कि रिजवी जैसे लोगों को अनावश्यक महत्व दिया जा रहा है। ऐसे लोग दोनों समुदायों के बीच भाईचारे को खत्म करना चाहते हैं। दोनों संप्रदाय अपने-अपने धार्मिक स्थलों को लेकर खुश हैं। लेकिन रिजवी जैसे लोग दोनों समुदायों के बीच दरार डालना चाहते हैं। ऐसे लोगों को महत्व नहीं दिया जाना चाहिए।