- ‘वैलेन्टाइन डे’ को ‘फैमिली यूनिटी डे’ के रूप में मनायें
- सी.एम.एस. के 56,000 छात्रों की अपील
सीएमएस के संस्थापक डा. जगदीश गाँधी के मार्गदर्शन में स्कूल के 56,000 छात्रों ने देश की युवा पीढ़ी खासकर छात्र-छात्राओं से पुरजोर अपील की है कि आगामी 14 फरवरी को संत वैलेन्टाइन के शहीदी दिवस ‘वैलेन्टाइन डे’ को ‘फैमिली यूनिटी डे’ के रूप में मनायें एवं पारिवारिक एकता व सामाजिक एकता का अलख जगाकर राष्ट्र के नैतिक व आध्यात्मिक प्रगति में योगदान दें।
गोमती नगर के आडिटोरियम में आयोजित आज एक प्रेस कान्फ्रेन्स में सी.एम.एस. के 56000 छात्रों का प्रतिनिधित्व करते हुए विद्यालय के 6 छात्रों ने जोरदार तरीके से ‘वैलेन्टाइन डे’ के विकृत स्वरूप से किशोरों व युवा पीढ़ी का आगाह करते हुए कहा कि ‘वैलेन्टाइन डे’ की मूल भावना को भुला दिेये जाने के कारण यह पवित्र दिन विकृत रूप लेता जा रहा है जिससे युवा पीढ़ी दिशाभ्रमित हो रही है। पारिवारिक एकता हेतु संत वैलेन्टाइन ने अपने जीवन का बलिदान दिया था, अतः पारिवारिक एकता को मजबूत कर संत वैलेन्टाइन को सच्ची श्रद्धान्जलि दी जा सकती है।
प्रेस कान्फ्रेन्स में अपने विचार रखते हुए छात्रा आईसी शुक्ला ने कहा कि वैलेन्टाइन डे ‘शोक दिवस’ है। संत वैलेन्टाइन के प्रति सच्ची श्रद्धा यही होगी कि सभी लोग एक दूसरे आदर करें, सम्मान करें, तभी एक आदर्श समाज की स्थापना होगी।
श्रेया शुक्ला एवं नन्दिनी मिश्रा का कहना था कि आजकल वैलेन्टाइन डे नैतिक जिम्मेदारियों को नकारते हुए मनाया जाता है एवं मात्र सस्ती लोकप्रियता के लिए युवा पीढी को गुमराह किया जा रहा है, इसे तत्काल रोकने की आवश्यकता है।
साक्षी सचान का कहना था कि आज इस बात की महती आवश्यकता है कि छात्र समुदाय वैलेन्टाइन डे की आड़ में अनैतिक विचारों एवं आधारहीन खुशियों के स्वार्थी उद्देश्य को समझ पायें। इसी प्रकार अदवन्त मिश्रा एवं आदित्य राय का कहना था कि वैलेन्टाइन डे का विकृत स्वरूप नई पीढ़ी को चरित्रहीन एवं मानसिक रूप से कमजोर बना देगा। हमें इसके वास्तविक स्वरूप व इसके सही अर्थ को जानने समझने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर डा. जगदीश गाँधी ने कहा कि स्कूलों और कालेजों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे आगे आकर किशोर एवं युवा छात्रों के मार्गदर्शक बने और एक स्वच्छ, स्वस्थ तथा चारित्रिक गुणों से ओतप्रोत समाज का निर्माण करें। हमारा कर्तव्य है कि वैलेन्टाइन डे के सही मायने पूरे विश्व के बच्चों को समझायें जिससे कि प्रत्येक बालक के हृदय में ईश्वर के प्रति, अपने माता-पिता के प्रति, भाई-बहनों के प्रति और सगे सम्बन्धियों के प्रति भी पवित्र ईश्वरीय प्रेम की भावना बनी रहे।







