लखनऊ फ़िल्म फोरम का आयोजन कौशल विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा। बालीबुड के प्रमुख कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छबड़ा ने लखनऊ में अपना प्रोडक्शन इंस्टिट्यूट खोलने का ऐलान किया। इसके अलावा शैक्षिक सहयोगियों को लखनऊ लखनऊ फ़िल्म सिटी फोरम के माध्यम से छत्रों को रचनात्मक कौशल कार्यशाला के जरिये रोजगार के अवसर मिलेंगे। इससे वह स्वयं स्टार्ट अप की भी शुरुआत कर सकते है। प्रयागराज से सांसद डॉ रीता बहुगुणा ने इस प्रकार के प्रयास को सराहनीय बताया।

उन्होंने कहा कि बेशक फ़िल्म इंडस्ट्री मुम्बई में है, लेकिन इसकी सफलता उत्तर प्रदेश जैसे हिंदी भाषी राज्यों पर ही निर्भर है। इसको नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लखनऊ फ़िल्म फोराम इकहत्तर नए आयाम से जोड़ने वाला है। इनका सीधा संबन्ध उत्तर प्रदेश सरकार के कौशल विकास और रोजगार परक योजनाओं के साथ है। इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं है। संघर्ष तो जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में है। इसमें भी है। लेकिन जिनकी कला में रुचि है,जिनमें कुछ कर दिखाने का जज्बा है, वह फ़िल्म जगत में अपनी जगह बना सकता है। इसका आयोजन अमरीन फाउंडेशन ने किया था।
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लखनऊ फ़िल्म फोरम रील टॉक में लघु सिनेमा, संवाद व फ़िल्म के अन्य पक्षों से संबंधित इकहत्तर मुद्दे शामिल थे। मुकेश छाबड़ा, अश्वनी अय्यर तिवारी, चित्रांगदा सिंह, अनुप्रिया गोयंका, गौतम तलवार, अभिषेक सिंह, अपर्णा आचरेकर जैसे कलाकरों ने सहभागिता की। संचालन गौरव द्विवेदी ने किया।

इस आयोजन का लक्ष्य लखनऊ को फ़िल्म जगत के एक केंद्र के रूप में विकसित करना है। इस समारोह में कलाकारों के विचार साझा करने के साथ ही अनेक विषयों पर बनी फिल्मों की इस्क्रिनिंग भी की गई। इसके अलावा कला में रुचि रखने वाले युवा वर्ग को प्रोडक्शन हाउस के कर्ताधर्ता से लेकर कलाकरों के विचारों व अनुभव से परिचित कराया गया। इससे रोजगार संबन्धी जानकारी भी दी गई।
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उत्तर प्रदेश के अनेक ऐतिहासिक व प्राकृतिक रूप से समृद्ध स्थानों पर फिल्मों की शूटिंग को भी बढ़ावा दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग एमरान के जरिये उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर बड़े पर्दे लाने का अवसर प्रदान करेगा। इसके अलावा प्रशिक्षित गाइड भी उपलब्ध कराए जाएंगे। लघु फ़िल्म निर्माण प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया। इसमें पैंतीस फिल्मों को स्थान मिला।
- डॉ दिलीप अग्निहोत्री






