सरकार सैनिकों के साथ: रक्षा मंत्री

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नरेंद्र मोदी सरकार बनने के पहले चालीस वर्षों से वन रैंक वन पेंशन पर निर्णय लंबित था। यूपीए सरकार के सामने भी यह मुद्दा उठता रहा, लेकिन उसने भी इस पर कोई निर्णय नहीं लिया। नरेंद्र मोदी सरकार ने इस योजना को लागू किया। उनकी सरकार सैनिकों को सुविधाए प्रदान करने के लिए कटिबद्ध है।

इसी के अंतर्गत देश में पेंशन अदालतों के संचालन का फैसला लिया गया। जिससे रिटायर हो चुके वरिष्ठों को पेंशन के मुद्दे पर किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। ऐसी ही पेंशन अदालत लखनऊ में आयोजित की गई। इसमें यहां के सांसद और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने गठन के कुछ महीने में ही वन रैंक वन पेंशन की शुरुआत की थी। क्योकि सरकार सेवारत और अवकाश ग्रहण करने वाले सैनिकों को सुविधाएं देना चाहती थी। देश की रक्षा में सैनिक अपनी जान की बाजी लगा देते है। अगर देश सुरक्षित नहीं रहेगा तो विकास संभव नहीं है। पेंशन अदालत का आयोजन प्रधान रक्षा लेखा नियंत्रक पेंशन प्रयागराज और मुख्यालय मध्य रक्षा कमान संयुक्त तत्वावधान में किया था।

इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में सशस्त्र सेनाओं के सेवानिवृत्त वरिष्ठ लोगों और उनके परिवार वालों की पेंशन से जुड़ी शिकायतों व समस्याओं का समाधान करना है।

  • डॉ दिलीप अग्निहोत्री