#Dr.priynka reddy, RIP
बस हर एक वहशानेपन पे यहाँ मोमबत्ती ही काफ़ी हैं!
सरकारें कुर्सी तक और हम रोजी-रोटी तक ही काफ़ी हैं!!
अमन और चैन छिन चुका है हिंद की आबोहवा से।
यहाँ हर गली-हर सड़क भय में, हर हवा डरावनी है।।
नेताओं के इशारे पर एकत्रित भीड़ के नजारे देखे हैं।
भीड़ को सरकार से बातें मनवाने के तरीके देखे हैं।।
अब खुद के बच्चों के लिये खड़ा हो जा ‘ऐ भीड़तंत्र’।
समाज से ये कायरना दरिंदगी अब तुम्हीं को मिटानी है।।
सरकारें कुर्सी तक और हम रोजी-रोटी तक ही काफ़ी हैं!!
अमन और चैन छिन चुका है हिंद की आबोहवा से।
यहाँ हर गली-हर सड़क भय में, हर हवा डरावनी है।।
नेताओं के इशारे पर एकत्रित भीड़ के नजारे देखे हैं।
भीड़ को सरकार से बातें मनवाने के तरीके देखे हैं।।
अब खुद के बच्चों के लिये खड़ा हो जा ‘ऐ भीड़तंत्र’।
समाज से ये कायरना दरिंदगी अब तुम्हीं को मिटानी है।।
– राहुल
गली गली मा असुर घूमें:
बिना पूँछ सींग, गली गली मा असुर घूमें,
घूमें गाँव गाँव, नोचि नोचि खावें बोटी।
मेला हाट बाट, ठाट मारि रोज ठट्ठा करें,
देखैं घूरि घूरि औ निहारें बहू बेटी।
महिषा निसुंभ सुंभ, ताड़का सुबाहु सब,
धारे भले भेस लाज लूटै का धिया की।
जागा हे कन्हैया, राम आँखि मूनि सोवा जिन,
आवा कलिकाल, राखा लाज अब कुल की।।
– अरुण कुमार तिवारी







