एकता के सूत्र में समाज को पिरोती मकर संक्रान्ति

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मकर संक्रांति प्रति वर्ष 14 जनवरी के दिन मनाएं जाने की परम्परा है लेकिन इस वर्ष पूरे देश भर में में 15 जनवरी को मनायी जा रहा है, इसलिए शास्त्र नियम के अनुसार मध्यरात्रि में संक्रांति होने के वजह से पुण्य काल अगले दिन से प्राम्भ होगा। हिन्दू धार्मिक परम्परा में पौष माह में जिस समय सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते है मकर संक्रांति काल होने से उसी दिन समयानुसार मकर संक्रांति पर्व मनाते है। मकर संक्रांत के दिन से ही सूर्य की उत्तरायण गति प्रारम्भ होती है इसलिए इस त्यौहार को कहीं कहीं उत्तरायणी नाम से भी जाना जाता हैं। धर्मशात्रों के अनुसार इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शानि से मिलने उनके घर आते हैं और शनि देव मकर राशि के स्वामी हैं इसलिए इस त्यौहार को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है।

हमारे देश के उत्तर प्रदेश में इस दिन को भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना करने की मान्यताएं हैं इसलिए इस दिन को विशेषतः उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति पर्व को खिचढ़ी भी कहा जाता है। सुहागिन लड़कियों के घर उनके माता-पिता खिचड़ी के सभी समान दाल, चावल, तेल, सब्जी, नमक, हल्दी और सुहागन की सारी सामग्री बेटी को दानस्वरूप प्रदान करते हैं।

इस त्यौहार हमारे पूरे भारत देश में बड़े धूमधाम के साथ मनाने की परम्परा वर्षो से चली आ रही है, वहीं यह त्यौहार पूरे भारत मे अलग-अलग प्रदेशों में अलग-अलग दिनों एक आध दिनों के अंतराल में पृथक-पृथक नाम से भी मनाया जाता है। जैसे- पश्चिम बंगाल में मकर संक्रन्ति के नाम पर मनाया जाता है इस दिन हुगली गंगा नदी के तट पर सागर मेले का आयोजन किया जाता है। असम में इस त्यौहार को भोगली बिहू के नाम से मनाया जाता है।

देश के महाराष्ट्र् में इसे मकर संक्रांत कहते हैं और यह यहाँ का बहुत महत्वपूर्ण त्यौहार माना जाता है। इस दिन सुहागन औरतें, नमक, कपास और नमक आदि चींजे दूसरी औरतों को दान करती है। वैसे तो शास्त्रों में काला रंग अशुभ होता है लेकिन इस दिन महाराष्ट्र वासी काले कपडे पहनते है कर तिल और गुड़ के लड्डू बनाकर सगे-सम्बन्धी में बाटते है। वहीं आंध्रप्रदेश में संक्रांति के नाम से इस पर्व को पूरे तीन दिनों तक मनाये जाने की परम्परा है।

देश के गुजरात एवं राजस्थान जैसे राज्यों में इसे उत्तरायण पर्व के रूप में मनाते है। पतंग उत्सव का आयोजन किया जाता है। सभी परिवार और दोस्त मिलकर इस त्यौहार का आनंद उठाते है। पूरा दिन छत पर पतंगों को उड़ा कर आपस मे पतंगों को लड़ाते हैं और वहीँ साथ में तिल के लड्डू एवं भोजन इत्यादि करते है।

देश के तमिलनाडु राज्य में किसानों के इस प्रमुख पर्व को पोंगल नाम से मनाया जाता है। इस दिन भगवान् के सामने सभी अन्य को प्रसाद स्वरूप चढ़ा कर सभी लोग नए कपडे पहनते हैं। घी में दाल-चावल की खिचड़ी पकाकर स्वमं खाया और दूसरो को भी खिलाया जाता है।

पंजाब और हरियाणा राज्य में मकर संक्रांति को लोहड़ी के नाम से मनाया जाने वाला एक प्रसिद्ध त्यौहार है। यह लोहड़ी मकर संक्रान्ति के ठीक एक दिन पहले मनाया जाता है। यह पर्व विशेषतः पंजाबी एवं हरियाणवी लोग के मध्य उल्लास पूर्वक मनाये जाने के साथ ही साथ स्त्री पुरुष सात मिलकर संध्या के समय आग प्रज्वलित कर उसके चारों ओर घेरा बना कर बैठ जाते है और उनमें से कुछ स्त्री -पुरुष मिलकर नृत्य भांगड़ा डांस इत्यादि करते हुए मनोरंजन करके इस त्यौहार को मानते हैं।

  • प्रस्तुति: जी के चक्रवर्ती

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