अब हर प्राथमिक शाला में होगी लाइब्रेरी, बच्चों को मिलेगा महान व्यक्तियों को पढ़ने-समझने का मौका

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  • स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन को भी प्राथमिक विद्यालयों में मनाया जाएगा अभिव्यक्ति सप्ताह के रूप में, विद्यालयों में आयोजित की जाएंगी प्रतियोगिताएं

उपेन्द्र नाथ राय

लखनऊ, 05 अक्टूबर 2019: भाजपा की प्रदेश में सरकार बनने के साथ ही अनेक बदलावों के साथ प्राथमिक विद्यालयों में भी काफी सुधार करने की कवायद शुरू की गयी। अंग्रेजी माध्यम से लेकर अन्य कई बदलावों से प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई का कुछ माहौल बना है। अब मंत्रीमंडल विस्तार के बाद बने नए बेसिक शिक्षा मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डाक्टर सतीश द्विवेदी ने आते ही पहले भ्रष्टाचार खत्म करने की कवायद शुरू कर दी। इसके बाद अब बच्चों में राष्ट्रभक्ति और नैतिक जिम्मेदारी का भाव लाने का प्रयास किया जा रहा है। इस प्रयास में इस वर्ष से अब प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में लाईब्रेरी बनाये जाने की कवायद शुरू हो गयी है। बहुत जल्द ही यह लाईब्रेरी पूरे उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में देखने को मिलेगी।

बेसिक शिक्षा मंत्री डाक्टर सतीश द्विवेदी ने स्वामी विवेकानंद के विचार “शिक्षा मनुष्य-निर्माण की प्रक्रिया पर केन्द्रित हैं, न कि महज़ किताबी ज्ञान पर” को उद्धृत करते हुए बताया कि बच्चों में राष्ट्र भावना जागृत करने के साथ ही उनके स्वास्थ्य की चिंता की जा रही है। इसी कारण हर विद्यालय में प्रति दिन योग करना अनिवार्य कर दिया गया। स्वस्थ बच्चे में ही स्वस्थ मन का विकास होता है। इस कारण उनके स्वास्थ्य की चिंता सबसे पहले जरूरी है। उन्होंने कहा कि मनुष्य निर्माण तभी होगा, जब बच्चों में राष्ट्रभावना जागृत होगी। उन्हें किताब से इतर अपने राष्ट्र के महान पुरूषों के आदर्शों को समय-समय पर उन्हें बताया जाय। उन्होंने कहा कि हम बच्चों को पूरे विश्व की शिक्षा के साथ ही बच्चों को आदर्श मनुष्य बनाने के लिए भी संकल्पित हैं। इसी के तहत उन्हें अपनी किताबों से इतर अपने आदर्श महान पुरूषों केे बारे में भी बताने के कई यत्न किये जा रहे हैं।

शिक्षा का लक्ष्य और उद्देश्य तो मनुष्य का विकास ही है:

डाक्टर सतीश द्विवेदी ने स्वामी विवेका नंद के सन् 1900 में लॉस एंजिल्स, कैलिफ़ोर्निया में दिए गए एक व्याख्यान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था “हमारी सभी प्रकार की शिक्षाओं का उद्देश्य तो मनुष्य के इसी व्यक्तित्व का निर्माण होना चाहिये। परन्तु इसके विपरीत हम केवल बाहर से पालिश करने का ही प्रयत्न करते हैं। यदि भीतर कुछ सार न हो तो बाहरी रंग चढ़ाने से क्या लाभ? शिक्षा का लक्ष्य अथवा उद्देश्य तो मनुष्य का विकास ही है।

विवेकानंद का जन्मदिवस को मनाएंगे अभिव्यक्ति दिवस के रूप में:

उन्होंने कहा कि इसी को ध्यान में रखते हुए बच्चों में राष्ट्रभक्ति की भावना लाने के लिए ही हम इस वर्ष स्वामी विवेकानंद का जन्मदिवस को अभिव्यक्ति सप्ताह के रूप में मनाने जा रहे हैं। पूरे प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों में नैसर्गिक गुणों के विकास को दृष्टिगत करते हुए प्रोस्टर, भाषण आदि प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही स्वामी विवेकानंद के जीवन पर लेख आदि की प्रतियोगिताएं आदि आयोजित होंगी। इसकी तैयारी पूरी की जा चुकी है।

राष्ट्रभावना जगाने का प्रयास:

उन्होंने कहा कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जिससे जीवन संघर्ष से लड़ने की शक्ति मिले। इसके लिए हमने बच्चों को स्वामी विवेकानंद और अन्य महान व्यक्तित्वों के आदर्शों को बच्चों के व्यवहार में लाने के लिए उनके आदर्शों को बताने के लिए प्रबंध करने का प्रयास कर रहे हैं। इसी प्रयास के तहत हमने अभिव्यक्ति सप्ताह मनाने का फैसला किया है। इससे बच्चों में राष्ट्र भावना जागृत होगी।

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