आपसे संस्कार पाना चाहता हूं !

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चाणक्य ने कहा था यदि बच्चे को उपहार न दिया जाये तो वह कुछ समय तक ही रोयेगा, लेकिन यदि समय रहते संस्कार न दिया जाये तो वह जीवन भर रोयेगा। इस फोटो में बाबा जी ने जानबूझकर इस बच्चे के सामने छड़ी गिरा थी जिसे इस छोटे से बच्चे ने उस छड़ी को उठाकर अपने बाबा को सौप दिया इसके बाद उसने अपने बाबा के चरण स्पर्श किया। यह संस्कार पाने का उसका पहला कदम है। फोटो बेहद मार्मिक है ख़ास बात यह कि बच्चे ने मुँह में चुसनी लगा रखी है। फोटो: शगुन न्यूज़ इंडिया डॉट कॉम

उच्च विचार:


जाना सभी को है, किसी को थोड़ा जल्दी तो किसी को थोड़ी देर से, इसलिए ज्यादा जरूरी है जिंदगी के हर पल को जिंदादिली से जीना!


हमारे साथ जब भी कुछ बुरा होता है, हम उसका दोष दूसरों पर डाल देते हैं और खुद बच कर निकल जाते हैं. यह तरीका ठीक नहीं. अगर आप हर चीज के लिए दूसरों को दोष देंगे, तो स्थितियां कभी नहीं सुधरेंगी. बेहतर है कि खुद के भीतर की कमी को तलाशें, उसे दूर करें.


अगर दोस्ती आपकी सबसे बड़ी कमजोरी है तो इसका मतलब है कि आप दुनिया के सबसे मजबूत आदमी हैं।


दूसरों की भावनाओं से खिलवाड़ न करें। भले ही आप जीत जाएंगे लेकिन जिंदगी भर के लिए एक इंसान को खो देंगे।


 

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