मनुष्य का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि वह उकसाए जाने पर तुरंत प्रतिक्रिया देता है…
मनुष्य का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यही है कि वह उकसाए जाने पर तुरंत प्रतिक्रिया दे बैठता है। एक शब्द सुनकर गुस्सा, अपमान पर टूट पड़ना – यही हमारी कमजोरी है। लेकिन ओशो कहते हैं, “जो उकसाकर नियंत्रित किया जा सकता है, वह कभी स्वतंत्र नहीं हो पाता।”
गुस्सा कमजोरी, मौन शक्ति
ओशो के अनुसार, जब कोई हमें छेड़ता है, तो हमारा गुस्सा, अहंकार और आवाज़ तुरंत सामने आ जाती है। लेकिन असली ताकत मौन में छिपी है। मौन का मतलब दबाना नहीं, बल्कि गुस्से को देखना है। अपनी प्रतिक्रिया को बस देखो – बिना उसमें बह जाए।
मौन ही बदलाव का राज
जो व्यक्ति उकसावे पर भी मौन रहता है, वह किसी की कठपुतली नहीं बनता। वह खुद अपनी डोर अपने हाथ में रखता है। मौन में शांति है, बुद्धि है और अजेय शक्ति है। लड़ाई में जीतने वाला बड़ा नहीं, मौन में स्थिर रहने वाला सबसे बड़ा होता है।
ओशो का यह सुंदर विचार आज के तनाव भरे जीवन में एक गहरी सीख देता है – प्रतिक्रिया मत दो, सिर्फ देखो। और देखते ही सब बदल जाएगा।







