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    Home»धर्म»Spirituality»Short Inspirational

    दुःख आता है, लेकिन रुकना जरूरी नहीं

    ShagunBy ShagunApril 16, 2026 Short Inspirational No Comments3 Mins Read
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    Post Views: 60

    बच्चों से सीखो भूलने की कला: दुःख को पीछे छोड़, जीवन को नई शुरुआत दो

    जीवन सुख-दुःख का चक्र है। हर किसी के जीवन में दर्द आता है, लेकिन उसे कैसे झेला जाए, यह हर इंसान के हौसले पर निर्भर करता है। कुछ लोग इतने मजबूत होते हैं कि सबसे बड़ी विपदा को भी हंसकर पार कर लेते हैं, तो कुछ लोग छोटे-से दुःख में इतना टूट जाते हैं कि पूरा जीवन उसी घाव को सहेजे घूमते रहते हैं।

    जो हमारे वश में नहीं है, उसे बदलना मुश्किल है। लेकिन जो बीत गया उसे बार-बार याद करके अपने भविष्य को बरबाद करना भी तो हमारे हाथ में है। सवाल यह है हम दुःख को कितना समय और जगह देते हैं?

    बच्चों से सीखनी होगी भूलने की कला

    हम बच्चों को बहुत कुछ सिखाते हैं पढ़ाई, अनुशासन, अच्छी आदतें। लेकिन बच्चों से हम खुद क्या सीखते हैं?

    बच्चे गुस्सा होते हैं, रोते हैं, झगड़ते हैं, लेकिन कुछ ही देर बाद सब भूलकर फिर से हंसने और खेलने लगते हैं। वे पुराने दुःख को सीने से लगाकर नहीं घूमते। वे आगे बढ़ जाते हैं। यही वजह है कि बच्चों का दिल हमेशा हल्का और खुश रहता है।

    अगर हम भी वही सादगी और भूलने की कला सीख लें, तो जीवन बहुत हल्का हो सकता है।

    हौसले अलग-अलग, रास्ता एक ही

    सभी के दुःख लगभग एक जैसे होते हैं, लेकिन हर इंसान का हौसला अलग होता है। कोई एक झटके में बिखर जाता है, तो कोई मुस्कुराते हुए आगे निकल जाता है।

    जो लोग दुःख को बार-बार दोहराते रहते हैं, वे खुद को जेल में कैद कर लेते हैं। जबकि जो दुःख को स्वीकार कर आगे बढ़ जाते हैं, वे न सिर्फ खुद को बचाते हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन जाते हैं।

    अब समय है नई शुरुआत का

    बीते हुए को याद करके हम न तो अतीत बदल सकते हैं और न ही वर्तमान को बेहतर बना सकते हैं। लेकिन अगर हम बच्चों की तरह पुरानी बातों को भूलकर आज को बेहतर बनाने पर ध्यान दें, तो कल खुद-ब-खुद सुंदर हो जाएगा।

    • दुःख को सहेजकर रखने की बजाय उसे छोड़ने की हिम्मत करें।
    • गुस्से और आहत होने की बजाय माफ करने और आगे बढ़ने की आदत डालें।
    • और सबसे जरूरी – बच्चों की तरह हल्के दिल से जीवन जिएं।क्योंकि जीवन छोटा है।

    हर पल को दुःख में जीने के बजाय, बच्चों जैसी मासूम मुस्कान और भूलने की कला के साथ जीना कहीं ज्यादा खूबसूरत है।

    सबक सिर्फ इतना है:
    जो बीत गया, उसे जाने दो।
    जो आने वाला है, उसके लिए दिल खाली और उम्मीद भरा रखो।

    Shagun

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