मॉरीशस से मजबूत होते भारत के संबन्ध

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मॉरीशस को लघु भारत कहा जाता है। यहां की बहुसंख्यक आबादी भारतीय मूल की है। ब्रिटिश काल में यह लोग राम चरित मानस को अपनी पोटली में रखकर वहां गए थे। संघर्ष का लंबा समय व्यतीत किया। अपनी मेहनत से आगे बढ़े। अब सत्ता से लेकर उद्योग,व्यापर में निर्णायक योगदान की स्थिति में है। इस चकाचौध में इन्होंने अपनी मूल सभ्यता संस्कृति को कमजोर नहीं होने दिया। गंगा के प्रतीक रूप में पवित्र सरोवर बनाया। उसके तट पर भव्य शिव मंदिर है। पूरे मॉरीशस में रामलीला लोकप्रिय है। पिछले प्रयागराज कुम्भ में वहां के राष्ट्रपति सहित हजारों लोग स्नान के लिए पहुंचे थे।

मॉरीशस के प्रधानमंत्री ने भावपूर्ण ढंग से कहा कि उनका देश भारत के दिल में है। अवसर था वहां के कोर्ट भवन उद्घाटन का। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मॉरिशस के प्रधानमंत्री प्रवींद जगन्नाथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संयुक्त रूप से मॉरिशस के नए सुप्रीम कोर्ट भवन का उद्घाटन किया। देश की राजधानी पोर्ट लुई में इस भवन का निर्माण भारत के आर्थिक सहयोग से किया गया है। प्रविंद जगन्नाथ ने भारत के प्रति आभार व्यक्त किया। गत वर्ष नरेंद्र मोदी व मॉरिशस के प्रधानमंत्री ने संयुक्त रूप से वहां मेट्रो एक्सप्रेस व नया इएनटीअस्पताल प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया था। भारत के सहयोग से ही वहां एक बड़े अस्पताल का निर्माण शुरू हुआ था।

नरेंद्र मोदी ने कहा कि इतिहास में डेवलपमेंट पार्टनरशिप के नाम पर देशों को एक दूसरे पर निर्भर होना मजबूरी थी। इससे औपनिवेशिक व्यवस्था को बढ़ावा मिला। भारत के लिए विकसित सहयोग का मूल सिद्धांत पार्टनरों का सम्मान करना है। पोर्ट लुइस में नया सुप्रीम कोर्ट भवन भारत मॉरिशस सहयोग का प्रतीक है। नरेंद्र मोदी ने मॉरीशस की स्थानीय भाषा में भी कहा,विव लामिते एंत्र लांद ए मोरीस,अर्थात भारत मॉरीशस मैत्री अमर रहे। दोनों देशों के आत्मीय संबंधों के कारण ही भारत ने समय पर दवाइयों की आपूर्ति और अनुभवों को साझा किया और कोरोना प्रबंधन में सहयोग दे सका।

नरेंद्र मोदी ने नाम लिए बिना चीन पर भी प्रहार किया है। कहा कि भारत किसी देश को विकास परियोजनाओं के बहाने जाल में फांसता है। ना ही उसको अपना उपनिवेश बनाने की कोशिश करता है। भारत की अन्य देशों के साथ विकास भागीदारी का मानवीय आधार है। इसमें चीन जैसे छल कपट नहीं है। उन्होंने अफगानिस्तान से लेकर नाइजीरिया तक का उदाहरण दिया और कहा कि भारत देशों की संप्रभुता वैश्विक विविधता का सम्मान करता है।

भारत की डिवेलपमेंट पार्टनरशिप के केंद्र में सम्मान, विविधता,भविष्य का ख्याल और टिकाऊ विकास होता है। विकास में सहयोग के पीछे भारत के लिए सबसे बड़ा मौलिक सिद्धांत है। दूसरे पार्टनर्स का सम्मान करना। यही हमारी प्रेरणा है। यही कारण है कि हम किसी देश में विकास परियोजानओं के लिए कोई शर्त नहीं रखते। – डॉ दिलीप अग्निहोत्री

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