भारत के गद्दार और पाकिस्तान के एजेंट खूब मसरूफ हैं आजकल! 

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नवेद शिकोह 
लखनऊ, 20 फरवरी 2019: “मैंने उसे दिल दे दिया, हांलाकि जरूरत उसे दिमाग की थी”। ये साबित हो गया कि दिल देने वाला ज्यादा बेवकूफ था। देने वाले के पास दिमाग था ही नहीं। सिर्फ दिल था और वो अंधभक्ति में दे दिया।
दरअसल दिल देने वालों के पास दिमाग की ज्यादा कमी होती है। बिना दिमाग चलाये दिल दे बैठे लोगों की मदद करना हम सब का फर्ज है।
आईये कुछ दिमाग की बातें करें –
सिर्फ़ राष्ट्र भक्त होना ही जरूरी नहीं आप राष्ट्रभक्त दिखें ये भी जरूरी है। तिरंगा लेकर सड़कों पर निकल आईये और भारत माता की जयकारे लगाइये तो बहुत अच्छा लगता है। ऐसे मंजर भी देखने में अच्छे लगते हैं।  लेकिन कई बार आंखों को धोखा भी हो जाता है। कुछ लोगों की ऐसी टोली से सावधान हो जाइए, जो हाथ में तिरंगा लेकर पाकिस्तान के लिए काम करते हैं.. किसी राजनीतिक एजेंडे के लिए काम करते हैं। दुनिया को शांति का सबक सिखाने वाला तिरंगा हमारी आन-बान-शान और जान है। इसे हाथ में लेकर दंगा करने की कोशिश करने वालों को हमें चिन्हित करना है। भारत माता की जय कहने के बाद मां को गाली देने वाले चंद लोगों को पहचानये। ये मां की जय का जयकार लगाते हैं और भारतीय नागरिकों की मां को गाली देते हैं।
इनके खाने वाले दांत अलग हैं। दिखाने वाले दांतों पर भरोसा करना बड़ी भूल होगी।
पाकिस्तान की औकात तो कुछ भी नहीं लेकिन भारत के प्रति इसके अंदर नफरत का गुबार बहुत ज्यादा है।
आतंकवाद के जरिये ये एक तीर से कई निशाने लगाना चाहता है। पाक का सबसे बड़ा नापाक मकसद ये है कि भारत में हिन्दू-मुसलमानों के बीच नफरत दहकती रहे। साम्प्रदायिकता के माहौल में भारत में नफरत फैलाने वाली ताकतें हुकुमतें करती रहें..चुनाव जीतती रहें। ताकि भारत कभी विश्व शक्ति ना बन पाये। कमजोर बना रहे। अंतरराष्ट्रीय प्लेटफार्म पर इस बात का मैसेज जाये कि भारत में धर्म और जातियों के बीच टकराव बना रहता है। यहां कमजोर जातियों को दबाया जाता है। अल्पसंख्यकों पर जुल्म होते हैं।
आतंकी हमले करवाने का पाकिस्तानी मकसद ही यही होता है कि भारत में साम्प्रदायिक दंगे हों। नफरत फैले। हमारा देश कमजोर हो। पाक के इस नापाक मकसद को पूरा करने वालों के मंसूबों को पूरा मत होने दीजिए !
हमेशा की तरह इस बार भी सैनिकों पर आतंकी हमले के बाद देश में देशभक्ति की भावना लबरेज थी। सब बदला लेने की मांग कर रहे थे। दुश्मन देश के मंसूबों को नेस्तनाबूद करने के लिए सब आतुर थे। विपक्ष ने साफतौर पर सरकार से कहा कि हम सरकार के साथ है। आतंकियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। पाक को सबक सिखाया जाये। सरकार – विपक्ष और सवा सौ करोड़ लोगों की ताकत को कमजोर करने के लिये कुछ नाकाम साजिशें की गयीं। सवा सौ करोड़ में अपवाद स्वरूप पांच-सात सिरफिरे भारतीयों के बयान उछाले गये। आतंकी हमले पर सौ करोड़ हिन्दुओं में चार-पांच लोगों के और बीस करोड़ मुसलमानों में दो-तीन मुसलमानों के बेतुके बयानों को उछाला गया। हल्ला मचाया गया कि इस देश में गद्दारों की भरमार है।
जो लोग शांति की बात कर रहे थे। पाक प्रायोजित इस हमले को रोका जा सकता था। यदि सरकार लापरवाही नहीं करती। खुफिया जानकारी को नजरअंदाज नहीं किया जाता तो शायद पाकिस्तान की आतंकी साजिश कामयाब नहीं होती। हमारे सैनिक शहीद नहीं होते। इस तरह के सवाल उठाने वाले पत्रकारों और अन्य विशिष्ट भारतीयों को मां की गालियाँ देने की मुहिम चलाई गई।
क्या भाता माता का ये अपमान नहीं है कि भारतीय नारियों को गालियां दी जायें..  अखंड भारत को खंडित करने के लिए नफरत फैलाई जाये.. दंगे फैलाने की साजिश का राजनीतिक एजेंडा चलाया जाये। ये कहा जाये कि भारत में गद्दारों की भरमार है। ऐसी नफरत फैलाकर और मांओं को गालियां देकर भारत माता की जय जयकार करना डिसमैच सा नहीं लगता आपको !

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