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    Home»धर्म»Spirituality»Short Inspirational

    कोटद्वार का सिद्धबली मंदिर: जहां सभी भक्तों की होती हैं मनौतियाँ पूरी

    By January 25, 2020Updated:January 27, 2020 Short Inspirational No Comments4 Mins Read
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    • कोटद्वार पर ही महावीर बजरंग बली ने ली थी गुरू गोरखनाथ की परीक्षा, द्वंद्वयुद्ध में गोरखनाथ जी को नहीं हरा सके महाबली, मनौतियाँ पूरी होने पर भक्त कराते हैं भंडारा, सन् 2025 तक की हो चुकी है बुकिंग
     
    उत्तराखंड से लौटकर राहुल कुमार गुप्त की रिपोर्ट 
     
     
    शिवालिक पहाड़ियों से घिरा देवभूमि उत्तराखंड का एक शहर कोटद्वार भी अपनी सिद्धपीठ के लिये विख्यात है।
    यहाँ बजरंग बली का एक सिद्ध और प्राचीन मंदिर है यहीं गुरू गोरखनाथ की भी तपोस्थली है। यहाँ मंदिर बनने के पीछे एक सत्य घटना का आधार है।कहा जाता है कि ब्रिटिश शासनकाल में एक मुस्लिम सुपरिटेंडैण्ट घोड़े से कहीं जा रहे थे, जैसे ही वह इस पवित्र स्थान के पास पहुंचे बेहोश हो गए। बेहोशी की हालत में ही उन्हें स्वप्न आया कि यह स्थल सिद्धबली बाबा का तपोस्थल है और यहाँ मन्दिर बनाया जाए। जब उन्हें होश आया तो उन्होंने यह बात आस-पास के लोगों को बताई। उसके बाद से यहाँ भक्तों की संख्या बढ़ने लगी और उनकी मुरादें पुरी होने लगीं।
     
    बहुत सिद्ध है कोटद्वार का सिद्धबली मंदिर:

     

    बता दें कि यह स्थान श्री सिद्धबाबा (गुरु गोरखनाथ एवं उनके शिष्यों) का तपस्थान रहा है। श्री सिद्धबली बाबा मंदिर खोह नदी के तट पर स्थित है, और शिवालिक पहाड़ियों से घिरा हुआ है। यह मंदिर कुछ वर्ष पूर्व, भूस्खलन के कारण एक तिहाई तक ध्वस्त हो गया था, लेकिन आश्चर्य जनक रूप से अपने स्थान पर ही टिका रहा, और आज भी शहर के ऊंचाई में अपनी शान के साथ स्थित है। ऐसी मान्यता है कि जीर्ण अवस्था के समय, स्वयं हनुमान जी ने मंदिर को अपने कन्धों पर सहारा दिया था।

    कहते हैं कि यह पवित्र स्थल गुरू गोरखनाथ और महाबली बजरंगबली के द्वंद्वयुद्ध का भी गवाह है। ऐसी मान्यता है कि गुरु गोरखनाथ के गुरु मछेंद्रनाथ हनुमान जी की आज्ञानुसार त्रियाराज्य की रानी मैनाकनी के साथ गृहस्थ आश्रम का सुख भोग रहे थे। जब इस बारे में उनके शिष्य गुरु गोरखनाथ को पता चला तो वे दुःखी हुए। उन्होंने प्रण किया कि वह अपने गुरु को इससे मुक्त कराएंगे।

    जैसे ही वह त्रियाराज्य की ओर प्रस्थान कर गंतव्य मार्ग की ओर बढ़ते हैं तब रास्ते में कोटद्वार के इसी स्थल पर कुछ वक्त रुककर तप आदि करते हैं उसी समय बजरंगबली जी भी इनकी परीक्षा के लिये वनमानुष का रूप रखकर युद्ध करते हैं किन्तु गुरू गोरखनाथ के तपबल के आगे महाबली का बल भी कम पड़ने लगा तब हनुमान जी ने अपने वास्तविक रूप के दर्शन देकर उनसे वरदान माँगने को कहा। तब गुरू गोरखनाथ ने बजरंगबली से इस पवित्र स्थान में प्रहरी के रूप में रहने और अपने गुरू मछेंद्रनाथ को मोहमाया से छुड़ाने का वर माँगा। तभी से रामभक्त हनुमान यहाँ भी प्रहरी के रूप में विद्यमान हैं।

    मान्यता है कि जो भी पवित्र मन से कोई मनौती श्री सिद्धबली बाबा से मांगता है, अवश्य पूर्ण होती है। मनौती पूर्ण होने पर भक्तजन भण्डारा आदि करते हैं।

    बिना भेदभाव के सभी धर्म के अनुयायी यहाँ मनौतियां मांगने आते हैं। मनौतियां पूरी होने पर भंडारे का आयोजन होता है पर भंडारा बुक कराने के लिए आठ नौ साल का इंतजार करना पड़ता है क्योंकि इससे पहले कई लोग जिनकी मनौतियां पूरी हो जाती हैं उनका क्रमशः नंबर लगा रहता है और यह परम्परा लगभग कई वर्षों से चली आ रही है।

    भंडारे के आयोजन के लिए मंदिर समिति की ओर से बुकिंग की जाती है। भंडारा बुकिंग काउंटर के प्रभारी बताते हैं कि रविवार, मंगलवार और शनिवार को विशेष भंडारा होता है। रविवार और मंगलवार के भंडारा आयोजन 2025 तक बुक हो चुके हैं। यहाँ सभी समुदाय के लोग बिना भेदभाव के भंडारे का आनंद उठाते हैं। इस धाम में आते ही मन बहुत ही शांत और आनंदित हो उठता है। यहाँ बजरंगबली जी को प्रसाद के रूप में गुड़ और लड्डू चढ़ते हैं।

    कहते हैं कि इस पवित्र धाम में बाबा की चौखट से कोई भी श्रद्धालु निराश नहीं लौटता है। मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद यहां पूरी होती है।

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