जी के चक्रवर्ती
सोमवार 21 अक्टूबर के दिन देश के महाराष्ट्र और हरियाणा राज्य में विधानसभा चुनाव संपन्न हुये, जिसमें इस राज्य के लगभग 1.83 करोड़ मतदाताओं ने अपने-अपने मतों का इस्तेमाल कर अपने प्रतिनिधि को चुना। बता दें कि इस बार यहां के 90 सीटों के लिए कुल 1169 प्रत्याशी मैदान में थे। मीडिया के सर्वेक्षण जनता के सामने हैं और जीत का ढिंढोरा पीटा जा रहा है। किसी के गले जीत उतर रही है तो कोई इसे इवीएम के भरोसे जीत की हवा बता रहा है।
कुल 1169 में से 1138 उम्मीदवारों के शपथपत्रों की जांच “एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स” (ADR) द्वारा की है। इन सभी मे कुल 10 फीसद यानि कि 117 उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज होने का पता चला हैं, वहीं वर्ष 2014 के विधानसभा चुनाव के दौरान ऐसे प्रताशियों का आंकड़ा मात्र 6 फीसद ही था।
गंभीर मामलों के अपराधों में लिप्त कुल 70 उम्मीदवार अर्थात 7 फीसद हैं, जबकि पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान इसका आंकड़ा लगभग 5 फीसद था। इस तरह हम देखते हैं कि देश में होने वाले प्रत्येक चुनावों में प्रत्येक पाँच वर्षों के दौरान आपराधिक छवि वाले जैसे विधायको की संपत्तियों में दिन-दूनी और रात- चौगुनी की बृद्धि होती चली जाती है। इसके के साथ ही साथ आपराधिक प्रबृत्ति वाले विधायको कि संख्या में भी बृद्धि हो जाती है, जब कि वहां मौजूदा समय की किसी भी पार्टी की सत्ता रही हो अपराध एवं अपराधियों की संख्या में लगातार बढ़ती चली जाती है।

अब यहां प्रश्न उठता जरूर है कि हरियाणा ही क्यों, लगभग देश के सभी राज्यों में कमोवेश एक जैसी ही स्थिति है? जहाँ तक बात है इसमें यही बात नजर आती है कि देश मे आपराधिक प्रबृत्ति वाले नेताओं का बोलबाला अधिक रहने के पीछे यह पैसा ही है जो किसी भी व्यक्ति के पास अधिक हो जाने पर बदल जाता है और उसके बुरे कर्म उसपर हावी हो जाते हैं।
धन का अधिक होना या न होना भी किसी अभिशाप से कम नही है। धन का अधिक होना आपको कुकर्त्तों या अपराध की ओर ले जाएगा। वहीं यह आपराधिक छवि के लोग धन प्रलोभन के माध्यम से समाज के उन गरीब और मजलूमों का उपयोग कर अपराध करवाते हैं। बबाद में यही गरीब तबके के लोग ऐसे कामो को अंजाम देते-देते पेशेवर हो जाते हैं। कभी-कभी तो उन्ही लोगों में से कुछ एक लोगों का दुःसाहस इस हद तक जा पहुंचता है कि वह स्वयं चुनावी लड़ जाते हैं और राजनीति में अपना भविष्य तक बना लेते हैं और देश के बाहुबलियों में नाम शुमार करते हैं। थोड़ा सोच कर देखिए कि जब ऐसे ही लोग सत्ता के उच्च पदों पर विराजमान होंगे तो उस देश और वहां के निवासियों की कितनी दुर्दशा होगी, इसका हम और आप सहज ही अनुमान लगा सकते हैं।






