महिलाओं को अधिकार दिलाने वाली सेविकाओं को ही नहीं मिला 11 माह से वेतन

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संस्था के कार्यालय में ताला लगाकर किया प्रदर्शन

लखनऊ, 27 नवम्बर 2019: महिलाओं को अधिकार दिलाने की लड़ाई लड़ने वाली महिलाएं खुद ही वेतन न मिलने के कारण 11 माह से कठिनाइयों से लड़ रही हैं। कई बार महिलाओं ने निदेशक व अन्य उच्चाधिकारियों से गुहार लगाई लेकिन किसी ने एक न सुनी और काम करते रहने का दबाव बनाते रहे। जब हद से गुजर गयी तो लखनऊ पहुंचकर महिलाओं ने बुधवार को स्वयं सेवी संस्था के कार्यालय पर ताला लगा दिया। यह स्थिति है महिलाओं के अधिकार के लिए महिला समाख्या संस्था के सेविकाओं की, जो अपनी हक की लड़ाई लड़ रही हैं। यह संस्था महिलाओं को जागरूक करती है।

19 जिलों से सैकड़ों की संख्या में लखनऊ पहुंची महिला समख्या संस्था की सहयोगिनी ने बताया कि 7100 मानदेय सहयोगिनियों को मिलता है। यह मानदेय 11 माह से नहीं मिला है। जब भी निदेशक स्मृति सिंह से इसके लिए बात की जाती है तो वे सिर्फ काम करते रहने की हिदायत देती हैं। इस कारण जब अति हो गयी तो हम लोगों को कार्य बंद कर यहां आना पड़ा। दो दिन से अपनी मांग कर रहे हैं लेकिन किसी अधिकारी द्वारा कोई आश्वासन नहीं दिया गया। इसके बाद हम लोगों ने गोमतीनगर स्थित समाख्या कार्यालय में ताला बंद करना पड़ा।

जाैनपुर से आयी वंदना, चित्रकूट से ऊषा, औराई से ललिता, मथुरा से प्रेमलता, इलाहाबाद से सुशीला, बहराइच से उमा, बुलंदशहर से कंचन, शामली से रेखा ने आरोप लगाया कि संस्था की निदेशक से जब भी पैसे की मांग की जाती है, तब वे किसी न किसी बहाने से टाल जाती हैं। 11 माह से हम लोगों को फूटी कौड़ी नहीं मिली। ऐसे में कैसे काम किया जा सकता है, जबकि हमलोगों का काम पीड़ित महिलाओं को थाने से लेकर अन्य सहायता दिलाने का होता है। हम खुद ही अपनी सहायता के लिए तड़प रही हैं तो ऐसे में हम अपनी बहनों को क्या सहायता दिला सकती हैं।

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