अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने कहा, गंगा के तटीय क्षेत्रों में औषधीय एवं सगंध पौधों की व्यवसायिक खेती पर दें जोर, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश के किसान हैं शामिल
सीएसआईआर- केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान लखनऊ के सस्य एवं मृदा विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित औषधीय एवं सगंध पौधों पर द्विसप्ताहिक समन्वित कौशल विकास प्रशिक्षण शुरू हुआ। सोमवार से 12 फरवरी तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में महाराष्ट्र, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश आदि राज्यों से प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र के दौरान मुख्य अतिथि अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक केपी दुबे ने कहा कि गंगा के तटीय क्षेत्रों में औषधीय एवं सगंध फसलों की व्यवसायिक खेती कर किसानों की आर्थिक आय में वृद्धि की जा सकती है।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से मास्टर ट्रेनर बनाये जाएंगे, जो कि औषधीय एवं सगंध पौधों कि खेती को गंगा क्षेत्र में व्यापक रूप से फैला सकेंगे।
सीमैप के निदेशक डाक्टर अब्दुल समद ने बताया कि इस तरह का कौशल विकास कार्यक्रम सीमैप में पहली बार आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने वन विभाग उत्तर प्रदेश को इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में वित्तीय सहयोग के लिए धन्यवाद दिया और आह्वान किया कि इस कार्यक्रम से प्रशिक्षणार्थियों को औषधीय एवं सगंध पौधों की व्यवसायिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा।
वन निगम के प्रमुख डाक्टर प्रभाकर द्वारा प्रधानमंत्री वन धन योजना में सीमैप के सहयोग की आशा व्यक्त की गयी और इस योजना के बारे में प्रशिक्षणार्थियों को विस्तृत से जानकारी दी। डाक्टर सौदान सिंह, विभागाध्यक्ष सस्य एवं मृदा विज्ञान विभाग, सीमैप द्वारा किसानों को औषधीय एवं सगंध फसलों की नवीनतम कृषि तकनीकियों की जानकारी दी गयी। इस कार्यक्रम का संचालन सीमैप के प्रधान वैज्ञानिक एवं परियोजना प्रभारी डाक्टर राजेश कुमार वर्मा द्वारा किया जा रहा है।
इस कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत प्रतिभागियों को आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण औषधीय एवं सगंध पौधों की नवीनतम कृषि तकनीकियों, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं बाजार से जुड़ी विस्तृत जानकारी सीमैप के विषय विशेषज्ञ वैज्ञानिकों द्वारा दी जायेगी।







