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    जब इंटरव्यू में कई बार भावुक हुए मोदी

    By May 3, 2019 Interview No Comments5 Mins Read
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    डॉ दिलीप अग्निहोत्री
    साक्षात्कार जगत में एक नया अध्याय जुड़ा। लोकप्रिय अभिनेता ने देश के लोकप्रिय नेता का साक्षात्कार लिया। अक्षय कुमार के प्रश्न सामान्य जीवन पर आधारित थे, उतने ही सहज रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर दिए। इसमें उनके बचपन से लेकर आज तक के गैर राजनीतिक विषय शामिल थे। सामान्य परिवार के लोग इस सहजता को समझ सकते है। उनका भी जीवन ऐसे ही माहौल में रचता बसता है।
    नरेन्द्र मोदी का जन्म भी गरीब परिवार में हुआ था। अक्षय कुमार ने उनकी मां के विषय में भी सवाल किया। मोदी पहले भी बता चुके है कि उनकी माँ दूसरों के घरों में काम करती थी। एक बार उनकी चर्चा करते समय वह बहुत भावुक भी हो गए थे। अक्षय ने इसी सूत्र को आगे बढ़ाया। उनके पिता चाय बेचते थे। मोदीं ने भी बचपन में चाय बेचने का कार्य किया। जाहिर है कि उनका बचपन अभाव में बीता। अनेक बाल सुलभ इच्छाओं व आवश्यकताओं का दमन किया होगा। संघर्ष में बचपन बीता। यहीं से संकल्प व इच्छा शक्ति मजबूत हुई।
    मोदी ने अक्षय से कहा भी कि चाय बेचने के दौरान कई लोगों से मिलने और स्वाभव जानने का अवसर मिलता था। कोई डांट देता था और कोई भगा देता था। हिंदीभाषी  व्यापारियों के साथ संवाद से हिन्दी का ज्ञान हुआ। मतलब ज्ञान के प्रति उनकी जिज्ञाषा बचपन से थी। इसी से उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली होगी।  बचपन से ही वह संघ की शाखा में जाने लगे थे। वहां  वैज्ञानिक खेल खेले जाते हैं। सामाजिक विचारों का संस्कार उन्हें यहीं से मिला होगा। समूह में खेलना, चर्चा करना और समरसता का भाव संघ की शाखाओं से जाग्रत होता है।
    यह सभी लोग जानते है कि नरेन्द्र मोदी ने समाजसेवा का व्रत व संकल्प लिया था। इसके लिए उन्होंने परिवार का त्याग कर दिया था। परिवार ने भी यह स्वीकार कर लिया था कि उन्होंने नरेंद्र को समाज व राष्ट्र की सेवा के लिए सौप दिया है। परिवार ने उनके संकल्प को पूरा करने में सहयोग दिया। नरेंद्र ने भी अपने को परिवार के मोह से मुक्त रखा। वह गुजरात के मुख्यमंत्री रहे प्रधानमंत्री रहे, लेकिन परिवार का भंडार नहीं भरा। परिवार का कोई सदस्य उनके सरकारी आवास में नहीं रहा।
    अक्षय ने मां को साथ न रखने पर सवाल किया। नरेन्द्र मोदी का माँ के प्रति सम्मान व अपनत्व का भाव है। लेकिन वह मानते है कि प्रधानमंत्री बनने तक परिवार के साथ रहे होते, तो आज मां भी साथ होती। लेकिन समाजसेवा के क्षेत्र में आते ही परिवार छोड़ दिया था। यही जीवन स्थायी हो गया। नरेन्द्र और उनके परिजनों की यही आदत बन चुकी है। वैसे भी उनकी माँ अकेले नहीं रहती है। परिवार के अन्य सदस्य उनके साथ रहते है, उनकी देखभाल करते है। यह नरेंद्र मोदी के लिए सन्तोष का विषय होगा।
    मोदी ने इस समाज सेवा व्रत का बड़ी ईमानदारी से पालन किया। मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री के रूप में मिलने वाले वेतन को वह परिवार पर खर्च नहीं करते। वह कहते हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि मुझे मेरी मां से प्यार नहीं है। मेरी मां मुझसे कोई अपेक्षा नहीं रखती हैं।  मेरा परिवार को सरकारी खर्च नहीं लेता है। विधायक बनने से पहले नरेंद्र मोदी के पास कोई बैंक खाता नहीं था। विधायक बनने के बाद मेरा खाता खुला। मोदी ने कहा कि विपक्षी नेताओं के साथ उनके संबन्ध सौहार्दपूर्ण है।
    उन्होंने कहा कि मैं उनके साथ खाना खाता हूं। एक दिन संसद गया तो वहां गुलाम नबी आजाद से मिला और बातें की। इस पर मीडिया ने सवाल पूछा तो गुलाम नबी आजाद व हम एक परिवार की तरह हैं। कहा कि इस बात की जिक्र करूंगा तो मुझे चुनाव में नुकसान हो सकता है। ममता दीदी साल में एक दो कुर्ते और बंगाली मिठाई भेज देती हैं। इस विवरण से जाहिर है कि नरेंद्र मोदी ने इस साक्षात्कार को राजनीतिक लाभ हानि से दूर रखा। पश्चिम बंगाल में भाजपा का तृणमूल कांग्रेस से सीधा मुकाबला है। फिर भी सच्चाई बयान करने में मोदी ने संकोच नहीं किया।
    उन्होंने स्वीकार किया कि गुस्सा अंदर तो होता होगा लेकिन मैं व्यक्त नहीं करता हूं। मुझे कभी गुस्सा व्यक्त करने का अवसर नहीं आया। कभी मन में प्रधानमंत्री बनने का विचार नहीं आया और सामान्य लोगों के मन में ये विचार आता भी नहीं हैं।  मुझे कोई छोटी नौकरी मिल जाती तो मेरी मां उसी में पूरे गांव को गुड़ खिला देती। वैसे वह सेना में जाना चाहता थे। मोदी ने कहा कि मुझे आम पसंद है। वैसे जब मैं छोटा था तो हमारे परिवार की स्थिति ऐसी नहीं थी की खरीद कर खा सकें। लेकिन हम खेतों में चले जाते थे और वहां पेड़ के पके आम खाते थे। मोदी ने कहा  सोशल मीडिया जरूर देखता हूं इससे मुझे बाहर क्या चल रहा है इसकी जानकारी मिलती है। टविंकल खन्ना जी का भी ट्विटर देखता हूं और जिस तरह वह मुझ पर गुस्सा निकालती हैं तो मैं समझता हूं की इससे आपके परिवार में बहुत शांति रहती होगी।
    इसमें संदेह नहीं यह विलक्षण साक्षात्कार था। जिस समय आम चुनाव का प्रचार चरम पर हो, उस समय देश के प्रधानमंत्री का राजनीति से हट कर अपनी बात कहना बेमिशाल ही कहा जायेगा।
    भारत की बड़ी निर्धन व सामान्य आबादी इसे सहज रूप से समझ सकता है। जब मोदी कहते है कि आम बहुत पसंद था, लेकिन उसे उनका परिवार इसे खरीदने की स्थिति में नहीं था। यह बात केवल आम या अन्य फल तक सीमित नहीं है। ऐसी अनेक इच्छाओं का गरीबों परिवारों को दमन करना पड़ता है। मोदी का यह कहना भी महत्वपूर्ण है कि उनके जैसी पारिवारिक पृष्ठिभूमि वाले लोग प्रधानमंत्री बनने का सपना नहीं देखते।
    इस कथन से नरेंद्र मोदी ने भारतीय संविधान की प्रसंसा भी की है। जिसके चलते गरीब परिवार का व्यक्ति भी प्रधानमंत्री बन सकता है। समाजसेवा में आने के बाद भी नरेंद्र मोदी सामान्य जिंदगी पर अमल करते रहे। समाज और राष्ट्र के लिए उन्होंने जीवन समर्पित कर दिया। इस मार्ग पर वह अडिग है।

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