कहते हैं जल ही जीवन है और पानी बचाओ जैसे आह्वान तो बरसों से चल रहे हैं, लेकिन इनका असर कितना हुआ यह अभी भी देखने की बात है। सीधी बात करें तो रिपोर्ट आज भी यही बताती हैं कि जल का स्तर कम हो रहा है रिपोर्टें आज भी यही बताती हैं नल की टोटियों में पानी की जगह सुसु की आवाजें आना आम बात हो रही है। बारिश की कमी होते ही सूखे जैसी स्थिति पैदा हो जाती हैं। इसके बाद भी लोगों ने जल को लेकर जागरूकता जैसी कोई बात दिखाई नहीं दे रही है।
अब इस बात को ध्यान में रखने की जरूरत यह है कि ऐसी स्थितियां अंतता समाज पर गलत असर डालती ही हैं इसी कड़ी में एक खबर यह बताती है कि कई राज्यों में भूगर्भ जल का कोष खाली हो चुका है। चिंता की बात यह है कि यह संकट गहराता ही जा रहा है।

इसका मतलब यह भी है कि लोगों के रवैये में कोई बदलाव नहीं हुआ और वह मुश्किल हालात से भी सबक लेने को तैयार नहीं है, यही नहीं हमें यह भी जान लेना चाहिए कि उत्तर प्रदेश के 17 जिलों में भी जल संकट गहरा चुका है यह स्थिति तब है। जब जल जागरुकता अभियानों के साथ जल संरक्षण के तरीकों को भी लागू किए जाने की बात हो रही है। इसके लिए तकनीक इजाद करने के साथ भवन निर्माण के समय उसको भी स्थापित करने की अनिवार्यता निर्धारित की गई है। फिर भी स्थिति नहीं सुधर रही है तो उसके पीछे यही मानसिकता जिम्मेदार हैं जिससे एक व्यक्ति अनावश्यक रूप से पानी बर्बाद करता है।

सार्वजनिक स्थानों पर तो इसे और भी गहरा संकट होते देखा जा सकता है। सरकारी नलों से अनावश्यक रूप से पानी बहता रहता है पर किसी को उसे बंद करने का ख्याल तक नहीं आता! एक ऐसे समय जब पानी का वाजिब खर्च भी बढ़ता जा रहा है। तब यह जरूरी है कि उसके इस्तेमाल में जहां तक हो सके किफायत बरती जाए। वरना वह दिन दूर नहीं जब पानी की राशनिंग होने का समय आने में देर नहीं लगेगी?







