ब्रिटिश थाने की कहानी जहां किसानों को दी जाती थी यातनाओं के बाद फांसी!

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क्या शहीदों को ऐसे ही मिलेगा सम्मान: कीमती सामान व् दस्तावेज हुए चोरी

हमारे देश के इतिहास में न जाने ऐसे कितने क्रन्तिकारी हुए जिसमें उन्होंने आजादी के लिए कितनी यातनाएं झेली और दर्द सहे, इसमें कुछ तो इतिहास बन गए लेकिन कुछ ऐसे भी थे जो गुमनाम क्रन्तिकारी बनकर रह गए और उन्हें इतिहास में जगह नहीं मिल पायी।

भारत माता के अमर सपूत जिन्होंने देश की आजादी के खातिर अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया उनसे जुड़े ऐतिहासिक स्थलों को आज सहेजने की जरूरत है। ऐसे ही अंग्रेजों के समय की जेल, मानिकपुर में थी जो आज सरकार की उदासीनता के चलते लगभग धूल धूसरित हो रही है। इन्ही में से एक मानिकपुर ब्लाक संसाधन केंद्र के ठीक पीछे पड़ा खंडहर जो आज भी चींख-चींखकर अपने देश के लिए अपने प्राणों को न्योछावर करने वाले अमर शहीदों की याद दिलाता है।

आपको बता दें कि मानिकपुर (चित्रकूट) जिला मुख्यालय से 30 किमी की दूरी पर है । मानिकपुर नगर में स्वतन्त्रता संग्राम और उस समय के बहुत अवशेष जीवित हैं परन्तु मात्र खंडहरों के रूप में, अगर अगले 2-3 साल तक इनकी देखरेख नही की गई तो ये धूल धूसरित होकर मिटटी में कहीं गम हो जायेंगें। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह स्थान 100 साल से भी अधिक पुराना है। नगर के कुछ बुजुर्गो के अनुसार यहाँ 60 साल पूर्व थाने में ब्रिटिशो के द्वारा देशभक्तो को फाँसी दी जाती थी।

आप आज इसकी हालत देखें तो आपको बहुत दुःख होगा। यहाँ का हर कीमती सामान व् दस्तावेज लोहे से बने दरवाजे व् छड़ व् अन्य बेशकीमती सामान सरकार की उदासीनता के कारण चोरी हो गए। क्या शहीदों को ऐसा ही सम्मान मिलता रहेगा । पुरातत्व विभाग की उपेक्षा के चलते स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देश भक्तों के ऐसे शहीद स्थल खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। इस स्थान को शहीद स्थल के रूप में विकसित करना चाहिए।

● प्रस्तुति: अनुज हनुमत

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