लखनऊ, 06 जून। बजबजाती नालियां, गंदगी और अधखुले मेनहोल की शिकायत नगर निगम में कई बार करने के बाद भी जब 15 दिन तक कोई सफाईकर्मी नहीं आये तो इंदिरा नगर स्थित गाजीपुर और उससे सटी आवास विकास कालोनी के नागरिकों ने अप्पने हाथों में फावड़ा, तसला और झाड़ू लेकर गंदगी-मलबे से पटी रोजा अफ्तार की जगह को चमका दिया। तब कहीं जा कर रोजा अफ्तार का आयोजन मुमकिन हो सका।
इस मामले में इंसानी बिरादरी के खिदमतगार वीरेन्द्र गुप्ता ने बताया कि पिछले साल मोहर्रम के अगले दिन 2 अक्टूबर को सीवर लाइन बिछाने के लिए गलियां खोदी गयी थीं लेकिन उसे जस का तस छोड़ दिया गया। दोनों मेनहोल अधखुले पड़े रहे और उसके ढक्कन भी जर्जर बने रहे। पहले की तरह आज भी सीवर का पानी अक्सर उफनता रहता है जिसकी बदबू से बीमारी फैलने की आशंका हर वक्त बनी रहती है। उन्होंने कहा कि सी ब्लाक मस्जिद के पीछे स्थित मजार के पास मलबे का ढेर है जिसके पास रोजा अफ्तार समेत तमाम सामाजिक कार्यक्रमों के लिए खाने-पीने का सामान पकाया जाता है। इलाके में पसरी गंदगी के बीच मजार के पास सालाना उर्स और मेला भी हुआ। उन्होंने कहा कि नगर निगम के अलावा पड़ोस में रहने वाले भाजपा के स्थानीय पार्षद ने भी इस मामले में अपनी आंख और कान बंद रखे।
उन्होंने बताया कि साफ़-सफाई को लेकर कई-कई बार नगर निगम और जल संस्थान से गुहार लगायी। रोजा अफ्तार की जगह की बुरी हालत के बावत खबरें भी छपीं कि भीषण गंदगी ने लगाई रोजा अफ्तार पर रोक, कि नगर निगम की बेरूखी से रोजेदार दुखी, आदि-आदि। लेकिन ऐसी तमाम खबरें और गुजारिशें बेअसर रहीं। नगर निगम आंख मूंद कर सोता रहा, अपनी जिम्मेदारी से लगातार मुंह चुराता रहा।
उन्होंने दुःख और आक्रोश के साथ कहा कि रोजा अफ्तार का आयोजन नगर निगम का इंतज़ार कब तक करता। आखिरकार लोगों ने कमर कसी और जो काम नगर निगम की जिम्मेदारी थी, उसे मिलजुल कर खुद पूरा किया। ख़ास बात यह कि मजबूरी के चलते ज़रूरी बन गए इस ‘स्वच्छता अभियान’ में महिलाओं की भी बराबर की भागीदारी रही।
उन्होंने गर्व के साथ बताया कि रोजा अफ्तार हो या होली मिलन, इलाके के लोग जाति-धर्म से ऊपर उठ कर उसके आयोजन में जुटते हैं। सांप्रदायिक सौहार्द को तहस-नहस करने की तमाम कोशिशों के बावजूद इस परंपरा पर कोई आंच नहीं आयी है और यह बड़ी बात है।







