सर्द मौसम में रखें अपना ख्याल नहीं तो हो सकते हैं यह साइड इफेक्ट्स

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सर्दियों का सुहाना मौसम तब परेशानी का सबब बन जाता है, जब थोड़ी-सी लापरवाही से तबीयत नासाज हो जाती है। सावधानी बरतें तो इस मौसम का पूरा लुत्फ लिया जा सकता है। सर्दियां में स्किन समस्याएं जैसे ड्राइनेस, स्किन का फटना, डैंड्रफ आदि का सामना करना पड़ता है।

क्या हैं लक्षण: स्किन में खुजली, खिंचाव, जलन, सूजन आदि

कैसे करें कंट्रोल

  • गर्म नहीं, गुनगुने पानी से रोजाना अच्छी तरह नहाएं। नहाने के बाद शरीर पर नमी वाली क्रीम या ऐलोवेरा जेल लगाएं।
  • सिर भी रोजाना या एक दिन छोड़कर धोएं। सिर धोने से आधा घंटा पहले अच्छी तरह सिर में तेल मालिश कर लें।
  • माइल्ड फेसवॉश और क्रीम बेस्ड साबुन इस्तेमाल करें।
  • नहाने से पहले हो सके तो किसी भी तेल (बादाम या नारियल का तेल बेहतर है) से 15 मिनट बॉडी मसाज करें।
    अस्थमा या सांस की समस्या
  • सर्दियों में कई बार सांस की नली सिकुड़ जाती है। ऐसे में अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के मरीजों की दिक्कत बढ़ जाती है।

क्या हैं लक्षण:

  1. जल्दी-जल्दी सांस लेना, सीने में जकड़न या कसाव महसूस होना, सांस के साथ आवाज आना, शरीर के अंदर खिंचाव आदि।

कंट्रोल ऐसे करें: 

  1. ठंड, धुंध, धूल-मिट्टी और पालतू जानवरों से खुद को दूर रखें।
  2. इनहेलर हमेशा साथ रखें।
  3. स्मोकिंग न करें और स्मोकिंग करने वालों से भी दूरी बनाए रखें।
  4. बहुत ज्यादा गर्म या बहुत ज्यादा ठंडे तापमान में न जाएं।
  5. ताजा और गरम खाना खाएं। ठंडी और खट्टी चीजों से बचें।

क्या है इलाज:

  1. गर्म पानी का बार-बार सेवन करें। अदरक-तुलसी की चाय पी सकते हैं।
  2. सर्दी-जुकाम या सांस की समस्या है और नाक बंद है, तो रात को सोने से पहले स्टीम ले सकते हैं।
  3. अस्थमा अटैक होने पर डॉक्टर से संपर्क करें और फर्स्ट-एड के तौर पर इनहेलर का इस्तेमाल करें।
  4. अस्थमा का स्थायी इलाज मुमकिन नहीं। इसे कंट्रोल में रखने के लिए किसी योग गुरु से सीखकर प्राणायाम करें। इससे फेफड़ों की काम करने की क्षमता बढ़ जाती है।

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