नवेद शिकोह
लखनऊ, 04 मार्च। मीरा बाई मार्ग पर स्टेट गैस्ट हाउस के पास नफरत की प्रतीक होलिका दहन हुए दो दिन गुजर चुके हैं। ताज़ी हवाओं से भड़के शोलों ने पुरानी/एतिहासिक /पौराणिक नफरतों की प्रतीक होलिका को ख़ाक कर दिया। मामूली धुंआ अभी भी जारी है। इधर चंद कदमों पर स्टेट गेस्ट हाउस के गेट पर एक दूसरे को हरा-नीला रंग लगाते दो दोस्त गले मिल रहे थे।

होलिका दहन के चंद कदमों पर और स्टेट गैस्ट हाउस के गेट पर ये दो शख्स सपा-बसपा के जाने-पहचाने चेहरे थे।
दोस्त तो ये बरसों पुराने हैं लेकिन एक कांड के बाद इनके बीच ना इत्तेफाकी ने रिश्ते तोड़ दिये थे।
अपने अस्तित्व के प्रह्लाद को बचाने के लिए इन लोगों के आकाओं ने नफरत से सुलगती पुरानी दुश्मनी की होलिका के साथ ख़ाक कर दिया।
बरसों बाद सपा-बसपा के जाने-पहचाने इन दोस्तों को खुलेआम गले मिलने का मौका मिला। इत्तेफाक ये कि ये जगह स्टेट गैस्ट हाउस थी।







