दूसरे मजहब के महबूब से इजहार-ए-मोहब्बत और सहमति की लिस्ट जारी होगी
इंटर रिलिजन/इंटर कास्ट मैरिज सहायतार्थ परामर्श कैम्प लगायेगी ‘इंडियन लव बर्ड्स’ संस्था
वेलेन्टाइन डे में लव बर्ड्स की कोर्ट मैरिज के लिए सामूहिक आवेदन करेगी संस्था
नवेद शिकोह
लखनऊ, 09 फरवरी। गुलाब.. चाकलेट.. डेट.. गिफ्ट.. चैटिंग.. दिल की धड़कने.. आहों का भरना.. प्यार दिवस.. किस डे.. हग डे.. रोज डे….. इन सब बातों से कहीं ज्यादा ऊंचा है वेलेन्टाइन डे का दर्जा। वेलेन्टाइन डे का सही अर्थ है- मोहब्बत के लिए जिन्दगी तक को कुर्बान कर देने का दिन। इस दिन का इतिहास भी यही कहता है और आज के हालात में भी इस जज्बे को अपनाने की सख्त जरूरत भी है।
14 फरवरी को मनाया जाने वाला वैलेंटाइन डे इस बार शहीद दिवस के रूप में भी मनाया जायेगा।
नफरत के खिलाफ मोहब्बत की कुर्बानी के लिये शहादत के जज्बे की हिम्मत देगा वेलेन्टाइन डे।
देश, समाज, एकता, सौहार्द और भारत की अखंडता को चुनौती देने वाली शक्तियों को इंटर रिलीजन शादियों के एलान और इजहार – ए-मोहब्बत की गूंज चुनौती देगी।

लव जेहाद को सही तरीके से परिभाषित कर इसके सकारात्मक पहलुओं पर चर्चा होगी। प्रत्येक धर्म में इंटरकास्ट विवाह को सुलभ बनाने की रणनीति की योजना बनायी जायेगी। मोहब्बत के लिए जिन्दगी की कुर्बानियां देने वालों का जिक्र होगा और देश हित/समाज हित में इस जज्बे को आगे बढ़ाने के लिए जागरुकता पैदा की जायेगी।
नफरत की आग के दरिया में आब-ए-मोहब्बत (मोहब्बत का पानी) की दो-चार बूंदें भी भस्म हो जाती है। लेकिन ये आहुति नफरत को मिटा देने का शुभारंभ है.. शुभ संकेत है। हिन्दू और मुसलमान दोनो धर्मों के नौजवान इस यज्ञ में अपने जीवन की आहुति दे रहे हैं। आज के माहौल में नफरत की आग को शीतल करने के लिए प्रत्येक धर्म की नौजवान पीढ़ी को लव जेहाद जैसे अनुष्ठान का पुण्य जरुर हासिल करना चाहिए है।
चंद दिन पहले देश को जला रहे आग के शोलों को बुझाने के लिए अपनी चोंच मे दो बूंद पानी लेकर आग की लपटें में कूदने वाला प्यार का एक और परिन्दे ख़ाक हो गया। तमाम लव जेहादियों की शहादत की फेहरिस्त में अंकित का नाम भी अंकित हो गया।
” लव जेहाद” का नाम देने वालों को भले ही हम नफरत की सियासत करने वाली साम्प्रदायिक ताकतें कहते है, लेकिन पांच अक्षर के इन दो शब्दों का बहुत ही सकारात्मक, आध्यात्मिक, धार्मिक रुहानी और सर्व धर्म से जुड़ा इंसानी फलसफा है।
जेहाद ऐसे अनुष्ठान का नाम है जो स्थितियों के मुताबिक अपना योगदान देने के लिए वाजिब(अनिवार्य) होता है। आत्मरक्षा या राष्ट्ररक्षा के प्रति अपना धर्म निभाना जेहाद कहलाता है। अज्ञानता को हराकर ज्ञान हासिल करना, भड़के हुए जज़्बातों को क़ाबू करना, नफरत के खिलाफ मोहब्बत से नफरत को जीत लेने को भी जेहाद कह सकते हैं।
और जब देश-समाज और दो मजहबों, तो फिरक़ों के बीच नफरत की आग लगा दी गयी हो तो वाकई राष्ट्र हित, समाज हित और देश हित के लिए लव का जेहाद वाजिब हो जाता है।
बार्डर पर दुश्मन देश से अपने देश की रक्षा के लिए सैनिक अपनी जान न्योछावर कर शहीद हो जाता है।
मजहबी नफरतों की आग फैलाने वाले देश के दुश्मन आंतरिक युद्ध के जरिये देश को तोड़ने की साजिश कर रहे हैं।
देश की अखंडता की हिफाजत के लिए मजहबों को मोहब्बतें के धागे से बांधे रखने के लिए लव जेहाद करके शहीद हो जाइये। लेकिन देश को बचा लीजिए।







