ऐसा अद्भुत और अलौकिक मंदिर विश्व में कहीं और नहीं, मिस्र के पिरामिड से ज्यादा पत्थरों लगे हैं इसमें

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सबसे बड़ा हिंदू मंदिर: अंकोरवाट मंदिर

अंकोरवाट कंबोडिया में दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है, जो करीब 162.6 हेक्टेयर (402 एकड़) में फैला हुआ है। इसे मूल रूप से खमेर साम्राज्य में भगवान विष्णु के एक हिंदू मंदिर के रूप में बनाया गया था। मीकांग नदी के किनारे सिएम रीप शहर में बना यह मंदिर आज भी संसार का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है। यह मंदिर कम्बोडिया देश में स्थित है। यह मेरु पर्वत का प्रतीक भी है। इसकी दीवारों पर भारतीय धर्म ग्रंथों के प्रसंगों का चित्रण है। इन प्रसंगों में अप्सराएं बहुत सुंदर चित्रित की गई हैं तथा असुरों और देवताओं के बीच समुद्र मंथन का दृश्य भी दिखाया गया है।

विश्व के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थानों में से एक होने के साथ ही यह मंदिर यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों में से एक है। पर्यटक यहां केवल वास्तुशास्त्र का अनुपम सौंदर्य देखने ही नहीं बल्कि, यहां का सूर्योदय और सूर्यास्त देखने भी आते हैं। सनातनी लोग इसे पवित्र तीर्थस्थान मानते हैं। देश विदेश से लोग यहाँ इस मंदिर के वास्तुशास्त्र के सौंदर्य को देखने और यहाँ का सूर्योदय और – सूर्यास्त देखने भी आते हैं। कुछ धार्मिक लोग इसे दुनिया का सबसे बड़ा पवित्र तीर्थस्थान भी मानते हैं। इस मंदिर में मिस्र के पिरामिड से ज्यादा पत्थरों का प्रयोग किया है।

12वीं शताब्दी के लगभग सूर्यवमन द्वितीय ने अंग्कोरथोम में भगवान विष्ण का एक विशाल मंदिर बनवाया। मंदिर के प्रधान शिखर की ऊंचाई लगभग 65 मीटर है। मंदिर की रक्षा इसके चारों तरफ बनी एक खाई करती है, जिसकी चौड़ाई लगभग 700 फुट है। मंदिर के पश्चिम की ओर इस खाई को पार करने के लिए एक पुल बना हुआ है। पुल के पार मंदिर में प्रवेश के लिए एक विशाल द्वार निर्मित है, जो लगभग 1,000 फुट चौड़ा है। मंदिर की दीवारों पर मूर्तियों में पूरी रामायण अंकित है।

ऐसा कहा जाता है की इस मंदिर का नाता अलौकिक शक्तियों से रहा है। इस मंदिर को देखने से पता चलता है की, विदेशों में जाकर भी हमारे कलाकारों ने भारतीय कला को जीवित रखा था जिसका उदाहरण है अंग्कोरथोम नगर जो कंबुज देश की राजधानी थी। अपनी विशाल बनावट की वजह से इस मंदिर का नाम गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया है। इस मंदिर का इतिहास बहुत ही जटिल, रहस्यमय और रोचक है।

फोटो:गूगल से साभार

वहा विष्णु, शिव, शक्ति, गणेश इत्यादि देवताओं की पूजा प्रचलित थी। इन मंदिरों के निर्माण में जिस कला का अनुकरण किया गया है वह भारतीय गुप्त कला से प्रभावित दिखाई देती है। इस मंदिर का निर्माण भारतीय संस्कृति से काफी जुड़ा हवा है। माना जाता है कि यह मंदिर एक ही दिन में अलौकिक शक्तियों की मदद से बनाया था। पर इसी मान्यता के साथ- साथ यह भी माना जाता है कि, राजा ” जय वर्मन ” ने इस देश के राजधानी को अमर करने के लिए इस भव्य और विशाल मंदिर का निर्माण किया था।

मंदिर को देखने के बाद समझ आता है कि अंग्कोरथोम जिस कंबुज देश की राजधानी था उसमें भगवान विष्णु, शिव, शक्ति, गणेश आदि देवताओं की पूजा प्रचलित थी। इन मंदिरों के निर्माण में जिस कला का अनुकरण हुआ है, वह भारतीय गुप्त कला से प्रभावित जान पड़ती है। अंकोरवाट के मंदिरों, तोरणद्वारों और शिखरों के अलंकरण सभी में गुप्त कला प्रतिबिंबित है। कंबोडिया सरकार ने यह नियम बनाया है कि अंकोरवाट मंदिर के प्रधान शिखर की ऊंचाई से अधिक कोई भी इमारत देश में नहीं बनेगी। इसके अलावा सरकार ने अपने राष्ट्रीय ध्वज में मंदिर के चित्र को अंकित किया है। कुछ इसी तर्ज पर करोड़ों हिंदू भी मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम के मंदिर का निर्माण चाह रहे हैं।

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