IFWJ की चक्की के दो पाटों के बीच दबकर पिस रही उप्र संवाददाता समिति

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 पहले हम… असली हम….
एक हाथ में गुलदस्ता- दूसरे हाथ में मांग पत्र, बगल में कोई बड़ी हस्ती। और फिर सबसे अहम- क्लिक~क्लिक~क्लिक~ कैमरा क्लिक…
यूं तो उत्तर प्रदेश में पत्रकारों की समितियां, यूनियन और संगठन असंख्य हैं। हर गली, हर काॅलोनी और हर मोहल्ले में हर सप्ताह एक पत्रकार संगठन का जन्म हो जाता है।
लेकिन सही मायने में उ. प्र. राज्य मुख्यालय संवाददाता समिति ही समस्त पत्रकारों का प्रतिनिधित्व करती है। यूपी का ये इकलौता पत्रकार संगठन है जिसे राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त समस्त  पत्रकार (लगभग नौ सौ पत्रकार) बाकायदा चुनाव में वोट देकर चुनते हैं।
अपने प्रतिनिधि के तौर पर इन पर अपना विश्वास जताते हैं। इसलिए ही संवाददाता समिति को प्रदेश का सबसे बड़ा, विश्वसनीय, लोकतांत्रिक, संवैधानिक, आधिकारिक…. पत्रकार संगठन समझा जाता है। इसका चुनाव भी ऐसा वैसा नहीं होता। एक परिवार, एक लाॅबी या एक गुट के चंद लोगों के बीच चुनाव की फर्जी खानापूर्ति नहीं होती। संवाददाता समिति का चुनाव वरिष्ठ, निष्पक्ष और निर्विवाद पत्रकारों की लम्बी-चौड़ी समिति की निगरानी और सरकारी सुरक्षा के बीच संचालित होता है। प्रत्येक मान्यता प्राप्त पत्रकार को इस चुनाव में वोट करने का अधिकार मिलता है।
 खैर, इस सबके बावजूद पत्रकारों के द्वारा चुनी गयी उ प्र मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति आज हाशिये पर है। जिसकी वजह है IFWJ के बीच विवाद के बाद पैदा हुए इसके दो धड़।
ऐसा क्यों !
 ऐसा इसलिए क्योंकि IFWJ के एक धड़ के मुखिया संवाददाता समिति के अध्यक्ष है। IFWJ के दूसरे धड़ के मुखिया हैं के. विक्रम राव। इन्होंने अपने हिस्से के IFWJ की कब्जेदारी/भागीदारी /दावेदारी और सक्रियता के लिए मंडल अध्यक्ष बनाकर जिसे लगा रखा है वो संवाददाता समिति के सचिव हैं। यानी संवाददाता समिति के अध्यक्ष और सचिव अपने-अपने IFWJ की दावेदारी में इतना मसरूफ हो जाते हैं कि संवाददाता समिति के पदों के उन दायित्वों को भूल जाते हैं जो पत्रकारों ने उन्हें अपना विश्वास जता कर दिया था। प्रेस काउंसिल आॅफ इंडिया के अध्यक्ष जैसी कोई भी हस्ती शहर आती है तो IFWJ के दोनों धड़ों के लोगों में होड़ ये रहती है कि वो पहले जाकर अपने को असली वाला और दूसरे को नकली वाला बता दें। जल्दी-जल्दी फोटो भी खिंचवाकर सोशल मीडिया में डाल दें।
IFWJ हमारा है।
 इस बात की दावेदारी के तौर पर दोनो धड़ों के लोग एक हाथ में मांग पत्र और दूसरे हाथ में गुलदस्ता तैयार रखते हैं। और जल्दी से भागते हैं लखनऊ आने वाली किसी भी सरकारी विशिष्ट हस्ती के पास। ऐसे में  संवाददाता समिति के अध्यक्ष अपने वाले IFWJ के लोगों को लेते हैं। संवाददाता समिति के एक भी पदाधिकारी /सदस्य को ये अपने साथ नहीं लेते। संवाददाता समिति के सचिव भी यही हरकत करते हैं। क्योंकि इनका सिर्फ एक लक्ष्य है- ये दावेदारी कि IFWJ विरोधी का नहीं हमारे वाले बाॅस का है। हम असली हैं और वो फर्जी हैं।
यहीं नहीं शहर में आने वाली किसी भी हस्ती को IFWJ के दोनों खेमे घेरे ही होते हैं कि तीन-चार संगठन एक हाथ में गुलदस्ता और एक हाथ में मांग पत्र लेकर लाइन लगा देते है। इस बीच नदारद दिखते है तो उस पत्रकार समिति के पदाधिकारी जिन्हें सचमुच पत्रकारों ने अपना प्रतिनिधित्व सौंपा है।
 अब मुख्य खबर ये है कि उ. प्र. राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति के अध्यक्ष और सचिव के विरूद्ध अन्य पदाधिकारी/कार्यकाणी सदस्य एकजुट होकर आवाज उठाने की तैयारी कर रहे हैं। एतराज ये किया जायेगा कि पत्रकारों द्वारा चुनी गई समिति और इसके समस्त पदाधिकारियों को साथ लेकर अपनी जिम्मेदारियों को अंजाम देने के बजाय विवादित IFWJ में ही क्यों उलझे रहते हैं अध्यक्ष और सचिव !
नवेद शिकोह
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