लखनऊ, 21 अप्रैल। कहीं अख़बार बचाने की यलग़ार तो कहीं इज़्ज़त पर उंगली उठाने वाले के हाथों को तोड़ देने का अल्टीमेटम। उ. प्र. राज्य मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति का चुनाव जितने ज़ोर-ओ-शोर से हुआ उतने ही तेज़ी से नवनिर्वाचित संवाददाता समिति के पदाधिकारियों की सक्रियता की आहट सुनाई देने लगी।
अखबारी कागज पर जीएसटी से अखबारों के अस्तित्व पर मंडराते संकटों से पत्रकारों और लाखों अखबार कर्मियों की नौकरियां भी खतरे में हैं। जिसकी फिक्र में ही “अखबार बचाव संयुक्त मोर्चा” का गठन किया गया है। जिसकी अगुवाई के लिए नवनिर्वाचित संवाददाता समिति सामने आ सकती है।
अखबार बचाव संयुक्त मोर्चा:
समिति के सचिव शिवशरण सिंह को आज ‘अखबार बचाव संयुक्त मोर्चा’ के फाउन्डर पत्रकारों ने अभिनंदन के लिए आमंत्रित किया। उम्मीद जताई जा रही है कि समिति के सचिव पत्रकारों की नौकरी की हिफाजत के लिए अखबार बचाने की लड़ाई में अपनी अहम भूमिका निभाएंगे। ज्ञातव्य हो कि श्री सिंह पहले से ही अखबारी कागज को जीएसटी से मुक्त करने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। इन्हीं कारणों से नौकरी के खतरों से चिंतित पत्रकारों ने समिति के सचिव पद के लिए शिवशरण को भारी वोटों से विजयी बनाया।
जिस नेता महिला पत्रकारों पर अनर्गल टिप्पणी की है, वो माफी लायक नहीं:
दूसरी तरफ समिति की नवनिर्वाचित संयुक्त सचिव तमन्ना फरीदा का एक ताज़ा बयान सुर्खियों में है। महिला पत्रकारों के मान-सम्मान और उनके हक़ की लड़ाई को मुद्दा बनाकर समिति के सभी विजेता पदाधिकारियों में (अध्यक्ष को छोड़कर) सर्वाधिक मतों से जीतीं तमन्ना फरीदी ने आज एक फायर ब्रांड पत्रकार नेत्री की तरह बयान दिया है। उन्होंने अपने बयान का एक विडियो जारी करते हुए कहा कि जिस नेता ने भारत की महिला पत्रकारों पर अनर्गल टिप्पणी की है, वो माफी लायक नहीं है। यदि आगे किसी ने इस तरह महिला पत्रकारों की इज्जत पर उंगली उठाई तो उसके हाथ तोड़ दिए जायेंगे। तमन्ना ने देश की तमाम महिला पत्रकारों से आह्वान किया कि वो उस नेता की शर्मनाक टिप्पणी के खिलाफ आगे आयें।
-नवेद शिकोह








